वोकशनल कोर्स मे नही आ रहे है छात्र

वोकशनल कोर्स मे नही आ रहे है छात्र

रोशन कुमार राहुल, पटना : राजधानी के विभिन्न कॉलेजों में संचालित वोकेशनल पाठ्यक्रमों में कोर्स के प्रति समर्पित छात्र नहीं पहुंच रहे हैं। कहने को तो वे बीबीए, बीसीए व एमबीए-एमसीए आदि वोकेशनल कोर्स में दाखिले लेते हैं। जो उद्योग की मांग के अनुसार काफी ट्रेंडी माने जाते हैं। लेकिन अधिकांश छात्रों में कोर्स के प्रति दिलचस्पी देखी नहीं जा रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। बल्कि कोर्स में दाखिले के पूर्व प्रवेश परीक्षा के परिणामों में इसका खुलासा हुआ है। लिखित परीक्षा में तो इनका प्रदर्शन कुछ ठीक भी है। लेकिन साक्षात्कार में वे सामन्य प्रश्नों के जवाब देने में असक्षम हैं।

मजबूरी में भरते हैं सीटें

पटना विश्वविद्यालय में संचालित कई वोकेशनल कोर्स में सीट की अपेक्षा प्रवेश परीक्षा में काफी कम छात्र पहुंच रहे हैं। पटना कॉलेज में बैचलर ऑफ कम्युनिकेशन कोर्स इस बार 60 सीटों के लिए महज 90 आवेदन आए थे। इसी तरह एएन कॉलेज में एमबीए कोर्स में दाखिले के लिए 200 और एमसीए कोर्स में 364 आवेदन आए थे। बीएन कॉलेज में बैचलर ऑफ फंक्शनल इंग्लिश (बीएफइ) कोर्स में दाखिले के लिए महज साठ के करीब आवेदन आए थे। कॉलेज में बीबीए कोर्स का भी यही हाल है। पटना विवि में संचालित एमसीए कोर्स में नामांकन के लिए करीब 200 आवेदन आए थे।

कुशल छात्र नहीं मिल रहे

उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि वोकेशनल कोर्स में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा में छात्रों की संख्या बेहद कम है। लिहाजा कम संख्या में उम्दा छात्र चुनने की संभावना घट जाती है। इस बाबत पटना कॉलेज बीएमसी कोर्स के समन्वयक डॉ. शरदेंदु कुमार कहते हैं कि यदि प्रवेश परीक्षा में कम से कम 500 छात्र पहुंचते तो हमारे लिए सबसे उत्कृष्ट छात्रों को चुनना काफी आसान होता। हालांकि वे मानते हैं कि इस बार प्रवेश परीक्षा में कम छात्र शामिल होने के बावजूद बैच में अच्छे छात्र आए हैं।

छात्राओं का प्रदर्शन बेहतर

एएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ललन सिंह कहते हैं कि प्रवेश परीक्षाओं में केवल 50 फीसद ही पढ़ाई के प्रति गंभीर छात्र पहुंचते हैं। वे मानते हैं कि नामांकन के पहले साक्षात्कार में छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों की अपेक्षा काफी बेहतर हैं। वे यह भी कहते हैं कि सीबीएसइ या आइसीएसइ बोर्ड से पढ़ाई करने वाले छात्रों का कम्युनिकेशन स्किल ज्यादा बेहतर है। साक्षात्कार में कई छात्रों के हाव-भाव से पता चल जाता है कि उन्होंने अनमने ढंग से नामांकन के लिए आवेदन दिया है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि शहर में रहकर कम पैसे में वोकेशनल कोर्स डिग्री लेने की मोह में छात्र कोर्स में दाखिला लेते हैं।

:: एमसीए विभागाध्यक्ष का दावा अलग ::

पटना विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ कंप्यूटर एपलीकेशन कोर्स (एमसीए) के विभागाध्यक्ष डॉ. आरएस मिश्र कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि वोकेशनल कोर्स में मेधावी छात्र नहीं आ रहे हैं। विवि में संचालित एमसीए कोर्स की बात की जाए तो यहां से पढ़ने के बाद छात्र आज देश की दिग्गज कंपनियों में काम कर रहे हैं। मजे की बात यह है कि अधिकतर छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क के दौरान ही कंपनी प्रबंधन नौकरी का ऑफर दे रही है। ट्रेनिंग के समय उनकी कार्य कुशलता को देखते हुए कंपनी उनके साथ काम करने में रुचि दिखा रही है।

You must be logged in to post a comment Login