विवेक मूर्ति, अमेरिकी सर्जन जनरल बनने वाले पहले भारतीय

विवेक मूर्ति, अमेरिकी सर्जन जनरल बनने वाले पहले भारतीय

vivek murthy chosen surgeon general of america

भारतवंशी विवेक मूर्ति को अमेरिकी सीनेट ने विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद अमेरिका का सर्जन जनरल चुन लिया है। विवेक अमेरिका में भारतीय मूल के पहले और सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल होंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रभुत्व वाली सीनेट ने सोमवार को 51-43 मतों से 37 वर्षीय मूर्ति के नाम पर मुहर लगाई। हालांकि विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने मूर्ति की दावेदारी पर भारी विरोध जताया था। इंग्लैंड में जन्मे मूर्ति तीन साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका के मियामी में बस गए थे। अमेरिका में लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मूर्ति अग्रणी पैरोकार रहे। मूर्ति, 6,500 कर्मियों वाले यूएस पब्लिक हेल्थ सर्विस कमिशंड कॉर्प्स के भी संचालन प्रमुख होंगे, जो अमेरिकी सेना, नौसेना, वायुसेना, और मरीन सहित सात वर्दीधारी सेवाओं में से एक है। मूर्ति ने कहा कि सर्जन जनरल के रूप में उनकी प्राथमिकता पुरानी बीमारियों, धूम्रपान कम करने का प्रयास और मोटापे की समस्या का समाधान और आहार में सुधार रहेगा। राष्ट्रपति ओबामा ने मूत्र्ति के चयन के लिए सीनेट की सराहना करते हुए कहा एक अमेरिकी डॉक्टर की हैसियत से विवेक यह सुनिश्चित करेंगे कि हर एक अमेरिकी नागरिक खुद की और परिवार की सुरक्षा के बारे में जागरूर रहे। ओबामा ने कहा, “विवेक इबोला की रोकथाम और प्रतिरक्षक दवा को विकसित करने की प्रक्रिया में भी हमारी मदद करेंगे।” उन्होंने कहा कि विवेक के सर्जन जनरल चुने जाने से हमें अमेरिका और अफ्रीका में इबोला की रोकथाम और कई जिंदगियों को बचाने में सहायता मिलेगी। मूर्ति बोस्टन के ब्रिघम एंड वूमन्स हॉस्पिटल में चिकित्सक और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में निदेशक रहे हैं। वह 2008 में शुरू की गई संस्था डॉक्टर्स फॉर ओबामा के सह-संस्थापक भी रहे हैं, जिसका नाम बदलकर अब डॉक्टर्स फॉर अमेरिका कर दिया गया है। यह संगठन लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को प्रोत्साहन देती है। इस अभियान को ओबामाकेयर के नाम से भी जाना जाता है। मूर्ति को अमेरिकी सर्जन जनरल चुने जाने के लिए कराए गए मतदान में सोमवार को 51-43 मतों से उन्हें सर्जन जनरल चुन लिया गया, जहां रिपब्लिकन पार्टी के मात्र एक सदस्य ने मूर्ति के पक्ष में मत दिया, जबकि डेमोकेट्रिक पार्टी के तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया।

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