मुश्किल में फंस सकते हैं झारखंड के ये बड़े नेता

मुश्किल में फंस सकते हैं झारखंड के ये बड़े नेता

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सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को एक वर्ष में निपटाने का आदेश दिया है। इसके तहत मंत्री, पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायकों के मामलों के लिए स्पीडी ट्रायल का सहारा लेने को कहा गया है।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में लोक अभियोजक कार्यालय के दस एपीपी एक-एक अदालत में मंत्री, पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सूची तैयार कर रहे हैं। इस सूची में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामलों को शामिल नहीं किया जा रहा है।

इनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले
अदालत में बन रही सूची के मुताबिक मुख्यमंत्री रघुवर दास, सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक सरयू राय, विधायक मेनका सरदार, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता व पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां पर आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।

गवाही के कारण लंबित हैं कई केस
अदालत में माननीयों के ज्यादातर मामले गवाही के स्तर तक पहुंच गये हैं। कुछ मामलों में तो गवाह बकायदा अदालत में पेश भी हुए हैं। हैरानी की बात है कि इनमें ज्यादातर गवाह या तो पुलिस कर्मी है या फिर पुलिस अधिकारी। कई बार माननीयों के भी अदालत में अनुपस्थित होने के कारण गवाही नहीं हो पाई है। अब उन्हें अदालत से ज्यादा समय नहीं मिलेगा।

किस पर कितने केस
मुख्यमंत्री रघुवर दास : थाने से आरोपी को निकालने समेत छह केस
सांसद विद्युत वरण महतो : कदमा में सरकारी कार्य में बाधा डालने का एक मामला
विधायक सरयू राय : मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के दो मामले
विधायक मेनका सरदार : मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा का एक मामला
पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा : राज्य विशेष के लोगों पर भ्रामक बयान का एक मामला
पूर्वमंत्री बन्ना गुप्ता : स्टेशन पार्किंग में पुलिस पर हमला समेत तीन मामले
दुलाल भुइयां : साकची में बस चालक के अपहरण और मारपीट का एक मामला

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