सबसे बड़े राकेट जीएसएलवी एमके- 3 का सफल प्रक्षेपण

सबसे बड़े राकेट जीएसएलवी एमके- 3 का सफल प्रक्षेपण

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अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में आज भारत ने एक और छलांग लगाई। आज सुबह 9.30 बजे श्री हरिकोटा से भारत में बने सबसे बड़े रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 का सफल प्रक्षेपण किया गया। जिओ सिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल यानी जीएसएलवी मार्क-3 की यह पहली टेस्ट फ्लाइट है। प्रक्षेपण पूरी तरह से सफल रहा। इस बात की पुष्टि इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने की है।इस सफलता के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो अंतरिक्ष में बड़े सेटेलाइट भेजने की काबिलियत रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और परियोजना से जुड़े लोगों की मेहनत और सच्ची लगन से देश को यह गौरव प्राप्त हुआ है।जीएसएलवी मार्क-3 को श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। इस रॉकेट का वजन 630 टन है। इसकी ऊंचाई करीब 42 मीटर है और यह 4 टन का वजन ले जा सकता है। जीएसएलवी मार्क-3 को बनाने में 160 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट के साथ इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले यान को भी लॉन्च किया गया।मानवरहित इस यान को फिलहाल टेस्ट किया जा रहा है। यह यान दो से तीन लोगों को अंतरिक्ष में ले जा सकता है। यह यान 125 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाएगा, फिर पैराशूट के सहारे धरती पर लौटेगा। बंगाल की खाड़ी में यह यान लैंड करेगा, जहां इसे बाहर निकालने के लिए भारतीय जहाज़ मौजूद रहेंगे।

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