पहली बार भारत के दो विश्वविद्यालयों ने टाइम्स मैगजीन के टॉप 40 में जगह बनाई

पहली बार भारत के दो विश्वविद्यालयों ने टाइम्स मैगजीन के टॉप 40 में जगह बनाई

Indian Institute of Science, Bangalore

इस रैंकिग में जहां इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस 25 वें नंबर पर है वहीं आईआईटी बांबे 37 वें नंबर पर है. सोने पर सुहागा ये कि इन दो यूनिवर्सिटीज़ के अलावा भारत के 11 और यूनिवर्सिटीज़ इस रैंकिंग के टॉप 100 में जगह बनाई है.  ऐसा पहली बार हुआ है कि भारत के दो विश्वविधालय ने लंबी छलांगें लगाते हुए ‘टाइम्स हायर एड्युकेशन ब्रिक्स एंड इमर्जिंग इकॉनमीज’ की रैंकिग के टॉप 40 में जगह बनाई हो. ‘टाइम्स हायर एड्युकेशन ब्रिक्स एंड इमर्जिंग इकॉनमीज’ ने जो  रैंकिंग जारी की है उसमें 18 देशों के यूनिवर्सिटीज़ को शामिल किया गया था. भारत, चीन, मलेशिया, पाकिस्तान, रूस, तुर्की और चीली से लगभग 15 ऐसी यूनिवर्सिटीज हैं जिन्होंने पहली बार इस रैंकिंग में जगह बनाई.चीन ने विकासशील देशों की इस यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अपना दबदबा कायम रखा है. पहले दो स्थानों पर चीन का कब्जा है. वहीं पिछली बार जहां चीन की 23 यूनिवर्सिटीज़ टॉप 100 में शामिल थीं, इस बार ये संख्या बढ़कर 27 हो गई है. भारत, चीन से अभी काफी पीछे है, लेकिन अपनी स्थिति में सुधार करते हुए टॉप 100 में 11 स्थानों पर अपना कब्जा जमाया है. पिछली बार यह संख्या 10 थी.’टाइम्स हायर एड्युकेशन ब्रिक्स एंड इमर्जिंग इकॉनमीज’ रैंकिंग के एडिटर फिल बैटी का कहना है, “भारत ने ऐसी रैंकिंग में अपनी क्षमता दिखानी शुरू कर दी है, टॉप 100 में पिछले साल के नंबर (10) को बढ़ाकर 11 कर लिया है. अब सिर्फ चीन और ताइवान के पास टॉप 100 में भारत से ज्यादा संख्या है, भारत अब रूस और ब्राजील जैसी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आगे है, पर ये सुधार इस वजह से क्योंकि भारत के ज्यादातर संस्थानों को ऐसी रैंकिंग में बने रहने का फायदा समझ में आ गया है, और अब उनमें से ज्यादातर ऐसी रैंकिंग के लिए अपना डाटा शेयर कर रहे हैं.”इस रैंकिंग को मॉडर्न यूनिवर्सिटीज़ के मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने वाले कारकों जैसे (शिक्षा, रिसर्च, ज्ञान का प्रसार) को ध्यान में रखकर बनाया गया है. चीन की जो दो टॉप की यूनिवर्सिटीज़ हैं उनमें पेकिंग यूनिवर्सिटी और शिन्हुआ यूनिवर्सिटी शामिल हैं.सबसे अविश्वसनीय सुधार रूस ने किया है. पिछली रैंकिंग में रूस की मास्को यूनिवर्सिटी 10वें नंबर पर थी जो कि अब 5वें नंबर पर आ गई है. वहीं पिछले साल जहां रूस की सिर्फ दो यूनिवर्सिटीज़ टॉप 100 में थीं, वो अब बढ़कर सात हो गई हैं.

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