बिहार में शराबबंदी कानून में होगा संशोधन, आएये जाने …..

बिहार में शराबबंदी कानून में होगा संशोधन, आएये जाने …..

बिहार में शराबबंदी कानून में होगा संशोधन, आएये जाने .....#बिहार सरकार शराबबंदी के इरादे से एक ईंच भी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन कुछ कठोर प्रावधानों को जरूर लचीला बनाएगी या उसे पूरी तरह खत्म कर देगी। कानून में सुधार के लिए आम जनता से सलाह मांगने के बाद मुख्यमंत्री #नीतीश_कुमार ने मंगलवार को यहां जाने माने कानूनविद् #गोपाल_सुब्रहमणियम से मुलाकात की। समझा जाता है कि राज्य सरकार मौजूदा कानून में कुछ संशोधन के लिए राजी हो गई है।

किसी घर में शराब मिलने पर परिवार के सभी बालिग सदस्यों को अभियुक्त बनाने जैसे प्रावधान को रद्द करने की राय बन गई है। मालूम हो कि गोपाल सुब्रहमणियम ने शराबबंदी के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में मुफ्त दलील देने की पेशकश की है। सूत्रों ने बताया कि वे बिहार के नए शराबबंदी कानून के कड़े प्रावधानों की पहचान कर उन्हें हटाने या वैकल्पिक प्रावधान जोड़ने का सुझाव देंगे। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना है। संभव है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट को बताए कि वह मौजूदा कानून में क्या-क्या संशोधन करने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में कानून का संशोधित प्रारूप पेश किया जा सकता है। मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, आबकारी विभाग के प्रधान सचिव आमीर सुबहानी और बिहार के एडिशनल एडवोकेट जनरल ललित किशोर भी सुब्रहमणियम के घर पर मंत्रणा में शामिल हुए।
बदलाव क्या हो सकता है
– शराब पीने, रखने और बेचने पर सजा का प्रावधान अभी 7 से 10 वर्ष है जो आर्म्स एक्ट से भी कठोर है। इसमें परिवर्तन हो सकता है।
– घर में शराब मिलने पर 18 वर्ष से अिधक उम्र के सभी को सजा के प्रावधान खत्म हो सकते हैं।
– गुजरात की पैटर्न पर शराब पीने के लिए परमिट की व्यवस्था लागू करने पर विचार हो सकता है।
– सैनिक और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के संदर्भ में कानून में छूट मिलने के आसार हैं।
– होम्योपैथ और आयुर्वेदिक दवा में अल्कोहल के उपयोग पर छूट का प्रावधान किया जा सकता है।
– कानून के उल्लंघन पर आर्थिक दंड पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
– शराब मिलने पर घर जब्त करने का प्रावधान खत्म हो सकता है।
– शराब कंपनियों के प्रभारी को सजा से छूट की व्यवस्था संभव है।
हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था शराबबंदी कानून, सुप्रीम कोर्ट पहुंची है सरकार
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। 30 सितम्बर को पटना हाईकोर्ट ने एक अप्रैल को जारी शराबबंदी से जुड़े राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था। इस बीच, राज्य सरकार ने विधानमंडल से पारित और राज्यपाल के आदेश से नया शराबबंदी कानून दो अक्टूबर से लागू कर दिया। फिर भी राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। राज्य सरकार की याचिका तीन अक्टूबर को दायर की गई। इसपर सात अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और यू ललित की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही सरकार और अन्य पक्षकारों को बात रखने का समय दिया।
संशोधन के लिए सरकार ने लोगों से मांगी सलाह, शीतसत्र में आ सकता है बिल
सरकार ने मौजूदा शराबबंदी कानून में बदलाव के लिए लोगों से 12 नवंबर तक सुझाव मांगा है। इसके अाधार पर 25 नवंबर से 2 दिसंबर तक चलने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान 29 या 30 नवंबर को शराबबंदी कानून में संशोधन के लिए विधेयक आ सकता है। 2 अक्टूबर से नया शराबबंदी कानून लागू हुआ था। सुझाव feedbackprohibitionbihar@gmail.com पर दे सकते हैं। या नोडल अफसर सह आयुक्त उत्पाद के सचिव ओम प्रकाश मंडल के मोबाइल 9473400378 पर भी मैसेज किया जा सकता है। 06122205871 पर फैक्स भी कर सकते हैं। पटना में विकास भवन, नई सचिवालय में निबंधन, उत्पाद व मद्य निषेध विभाग में डाक के माध्यम से भी सुझाव भेजा जा सकता है।
आखिर बदलाव क्यों
राज्य में शराबबंदी की तारीफ हो रही है तो इस कानून के कुछ प्रावधानों की आलोचना भी हो रही है। कानून लागू करने वाली एजेंसियों एवं उत्पाद विभाग पर आरोप भी लग रहा है कि प्रावधानों का दुरुपयोग बेकसूर लोगों को फंसाने के लिए किया जा रहा है। सरकार के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं। सरकार इस आशंका से मुक्त नहीं हो पा रही है कि कहीं सुप्रीम कोर्ट में भी इन प्रावधानों की आलोचना न हो जाए। लिहाजा वह सुप्रीम कोर्ट में यह गारंटी करने जा रही है कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा।
मंत्री बोले – जरूरत के हिसाब से संशोधन
सरकार शराबबंदी के लिए दृढ़संकल्पित है। लेकिन जरूरत के हिसाब से इस कानून में संशोधन किया जा सकता है। कानून इस दृष्टिकोण से बना है कि किसी निर्दोष को परेशानी नहीं हो। लोग राजस्व क्षति की बात कर रहे हैं, क्या सरकार बनिया की दुकान है? सरकार के लिए लोगों के हितों की रक्षा सर्वोपरि है। -अब्दुल जलील मस्तान, मद्य निषेध मंत्री
सरकार का सवाल क्या शराब पीना मौलिक अधिकार?
– राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से यह जानना चाह रही है कि शराब पीना मौलिक अधिकार की श्रेणी में आता है या नहीं। संविधान में शराब राज्य सूची का विषय है। इस लिहाज से राज्य सरकार को इसके उत्पादन, कारोबार और सेवन पर पाबंदी लगाने का हक है या नहीं।
– क्योंकि पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि शराब पीने पर रोक का राज्य सरकार का आदेश लोगों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। यह व्यक्ति की निजता पर भी एक तरह का हमला है।

 

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