कथाकार महोत्सव में कथावाचकों ने किया रोमांचित

कथाकार महोत्सव में कथावाचकों ने किया रोमांचित

कथाकार महोत्सव में कथावाचकों ने किया रोमांचितइंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र #आईजीएनसीए में आयोजित कथाकार अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में जापान, चीन और मंगोलिया जैसे देशों के साथ ही भारत के अंदुरूनी हिस्सों की कहानियां छाई रहीं।

कथाकार इन कहानियों की बदौलत बच्चों के साथ-साथ वयस्कों को कल्पना के ऐसे धरातल पर ले गए, जिसे उनके लिए निकट भविष्य में भूल पाना संभव नहीं होगा। कथाकार अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का छठा संस्करण इंदिरा गांधी कला केन्द्र में शुरू शुक्रवार को हुआ। तीन दिन तक चलने वाला यह महोत्सव पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जीवन और बच्चे के रूप में उनके कार्यो पर आधारित कथा वाचन से शुरू हुआ।

पहले दिन जापान के कथाकारों ने श्रोताओं के बीच बैठे स्कूली बच्चों को लोकप्रिय जापानी कहानियां सुनाने के लिए परम्परागत कमिशीबाई पेपर थिएटर का सहारा लिया।

जापान की मंडली के कथाकारों ने श्रोताओं को मौखिक कहानियां सुनाई। इन कथाकारों ने कहानी सुनाने के दौरान सैकड़ों सचित्र पुस्तकों तथा संगीत का भी सहारा लिया। तीन कलाकारों ने मंच पर 12वीं शताब्दी की जापानी थिएटर शैली का मंचन किया।

केरल की एक छाया कठपुतली मंडली ने परम्परागत कला शैली – थोलोपावाकुतु के एक हिस्से को पेश किया।

तरेलनरपरकुतु संगम के के. विश्वनाथ पुलावर ने कहा, “हालांकि हमने पहले भी दिल्ली में प्रदर्शन किया है, लेकिन यह पहला मौका है जब हमने दिन के समय में प्रदर्शन किया। आम तौर पर तोलावाकुत्तु का प्रदर्शन चमड़े की कठपुतलियों का इस्तेमाल करते हुए होता है। ये कठपुतलियां अंधेरे की पृष्ठभूमि पर छाया का निर्माण करती है।”

ब्रिटेन की पेशेवर कथावाचक साराह रूंडले ने किसी कठपुतली का इस्तेमाल किए बगैर अपनी आवाज एवं एनिमेटेड इशारों के आधार पर सिल्क रूट की कहानियां सुनाई। इन कहानियों में एक कहानी बिल्लियों को आकर्षित करने वाले एक बच्चे की भी है। एक कहानी चीन की है, जो एक महिला एवं उसके पिग के बारे में है। कहानी सुनाने के दौरान दर्शक कथाकार के साथ गाने लगे।

दिल्ली में कथाकार महोत्सव तीन दिन तक चलेगा। उसके बाद यह मुंबई एवं बेंगलुरू में आयोजित होगा।

आईजीएनसीए की कार्यक्रम निदेशक मंगलन स्वामीनाथन ने कहा, “हर संस्करण के साथ यह महोत्सव बेहतर हो रहा है। यह पहला मौका है जब हमने एक जापानी ग्रुप को शामिल किया है। यह हमारे इस विचार के साथ शुरूहुआ कि समकालीन कहानियों के अलावा सभी संस्कृतियों एवं संभ्यताओं की कहानियों को पेश किया जाए। भारत को कहानियों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है और इसकी विविध कहानियों को पेश करने की तुलना में कुछ और बेहतर नहीं है।”

उन्होंने कहा कि इस साल के महोत्सव का आयोजन स्वयंसेवी संस्था – निवेश के साथ मिलकर किया गया। यह पहला मौका है जब इस महोत्सव को बेंगलूरू में भी आयोजित किया जा रहा है।

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