नये हूल की जरूरत 162 साल पुराने सपने को पूरा करने के लिए

नये हूल की जरूरत 162 साल पुराने सपने को पूरा करने के लिए

सिदो-कान्हो विश्वविद्यालय में ‘संताल हूल और उसकी प्रासंगिकता’ पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया है| विनोबा- भावे विश्वविद्यालय के वीसी और अर्थशास्त्री डॉ रमेश शरण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए|

प्रो रमेश शरण ने कहा कि नशापान के खिलाफ़, अशिक्षा और कुरीति के खिलाफ, भूख और कुपोषण के खिलाफ तथा सशक्त और सर्वोपरि ग्रामसभा के लिये हो एक नया हूल| संताल परगना के युवाओं से इस नए हूल के लिए आगे आने की अपील की| उन्होंने कहा कि युवा आगे आएंगे तो 162 साल पहले अमरनायक सिदो कान्हू का सपना और हूल के उद्देश्य होंगे पूरे

सेमिनार की अध्यक्षता वीसी प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा कर रहे थे, उन्होंने हूल को वैचारिक क्रांति की नींव बताया| कहा कि आज भी हूल की है जरूरत| हूल को नए नजरिये से देखने की जरूरत है| हूल ने एक छाप छोड़ा है और विश्वविद्यालय ने उसके बारे में सोचना प्रारम्भ किया है, अब हूल के उद्देश्यों को हासिल करना है|

हूल को हमने वो महत्त्व नही दिया, जो इसे दिया जाना चाहिए था| इतिहासकार और समाजशास्त्री इस पर चिंतन करें और इसके महत्व के बारे में नए दृष्टिकोण से देखें| सिदो कान्हू को यहां के लोग भगवान से कम नही मानते|

क्योंकि उन्होंने अपने लिए नही समाज के लिए लड़ाई लड़ी थी| फोकस करते हुए इनके कृतित्व को सामने लाने की जरूरत है|आज हूल चाहिये कलम से चाहिए| हूल की क्रांति को नई रचना मिले| कार्यक्रम में प्रोवीसी डॉ एसएन मुंडा, आयोजन सचिव डॉ अजय सिन्हा, संताल अकादमी के निदेशक सुजीत सोरेन मौजूद थे

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