भारत के मंगलयान का सफल रहा इंजन परीक्षण

भारत के मंगलयान का सफल रहा इंजन परीक्षण

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भारत के मंगलयान के 24 सितंबर को अपने गंतव्य के अंतिम पड़ाव में प्रवेश करने से पूर्व महत्वपूर्ण पहल के तहत सोमवार को इसके मुख्य तरल इंजन का सफल परीक्षण किया गया तथा यह मार्स आर्बिटर अपने परिपथ पर सही तरीके से आगे बढ़ रहा है। बुधवार के दिन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है जब यह यान इतिहास रच सकता है।

मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान) पर 300 दिन तक सुसुप्त अवस्था में रहने के बाद 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) इंजन को चार सेकंड के लिए चालू किया गया। इससे बुधवार को इस यान के मंगल की कक्षा में सफल प्रवेश के बारे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का विश्वास बढ़ा है। यदि सबकुछ सही रहा तो भारत पहले ही अभियान में मंगल की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला देश बन जाएगा।

यह लाल ग्रह पर उपग्रह भेजने वाला पहला एशियाई देश और इसरो यह काम करने वाली चौथी अंतरिक्ष एजेंसी होगी। यूरोपीय, अमेरिकी और रूसी यान मंगल की कक्षा में पहुंचने या इस पर उतरने में सफल रहे हैं, लेकिन वे कई प्रयासों में ऐसा कर पाए हैं।

इंजन को चालू किए जाने के बाद खुशी व्यक्त करते हुए इसरो के प्रमुख क़े राधाकृष्णन ने कहा कि अंतरिक्ष यान एकदम सही है। यह मंगल की अपनी 98 प्रतिशत यात्रा पूरी कर चुका है और अब हम 24 सितंबर की सुबह किए जाने वाले निर्णायक अभियान के लिए तैयार हैं।

मंगल पर पहुंचने के क्रम में यानों की विफलता की दर काफी उच्च रही है। अब तक के 51 अभियानों में से केवल 21 सफल रहे हैं। चीन का इसी तरह का अभियान 2011 में असफल हो गया था।

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