आईआईटी खड़गपुर ने रेशम से पहनावा प्रौद्योगिकी विकसित की

आईआईटी खड़गपुर ने रेशम से पहनावा प्रौद्योगिकी विकसित की

यह कल्पना कीजिए कि भारत निर्मित #स्मार्ट_वस्त्र आपके आसपास चल रही चीजों को सूंघ लेगा, आंकड़े जुटाएगा और आपको जरूरी कार्रवाई के लिए सूचित भी करेगा।

भारतीय वैज्ञानिक स्वदेशी तकनीक से इस तरह के पहनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने के करीब पहुंच गए हैं, और यह रेशम के खास गुणों की वजह से संभव हो सका है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के विशेषज्ञों का एक दल रेशम प्रोटीन पर आधारिक एक संकर सामग्री का निर्माण किया है, जिसे रेशम फाइब्रोइन के नाम से जाना जाता है।

इस नई सामग्री में जवानों एवं रक्षा कर्मियों व साथ ही बॉयोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए कपड़े पर आधारित स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के प्रोटोटाइप विकसित करने की संभावना है।

कोलकाता के एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के निदेशक समित के. रे ने कहा, “हमने इलेक्ट्रॉनिक्स व लाइट को जोड़ने वाले अनुप्रयोग के लिए सोने के नैनोपार्टिकल-एम्बेडेड रेशम प्रोटीन पर जिंक नैनोस्ट्रक्चर्स का उपयोग कर एक हाइब्रिड फोटो डिटेक्टर बनाया है।”

फोटो डिटेक्टर का संचालन प्रकाश संकेतकों को वोल्टेज या धारा में बदलकर होता है।

रे ने कहा, “हाइब्रिड सामग्री आंकड़े संग्रह कर सकती और पराबैगनी व दृश्य तरंगदैर्ध्य के रेंज दोनों में यह प्रकाश की पहचान कर सकती है, जिससे अत्यधिक संवेदनशीलता और पहचान हो सकती है।”

रे ने कहा, “यह गुण रेशम फाइब्रोइन व सेमी कंडक्टिंग जिंक आक्साइड की मौजूदगी में गोल्ड नैनोपार्टिकल की वजह से होता है।”

रे ने कहा, “बॉमबिक्स मोरी रेशम कीट दुनिया भर में रेशम फाइब्रोइन का मुख्य उत्पादक है, जो कोकून के रूप में है। यह फाइब्रोइन इसकी आर्कषक उच्च यांत्रिक दृढ़ता, मजबूती, तापीय स्थिरता और बायोकामपैक्टबिलिटी/बायोडिग्रेबिलिटी की वजह से है।”

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