FII इनवेस्टमेंट 7 महीने के निचले लेवल पर आया

FII इनवेस्टमेंट 7 महीने के निचले लेवल पर आया

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इंडियन इक्विटी मार्केट्स में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स का इनवेस्टमेंट 7 महीने के निचले लेवल पर आ गया है। इसकी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की तैयारी को देखते हुए इंडिया और दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स में बिकवाली की आशंका है।

FII ने सितंबर में इंडियन मार्केट में लगभग $84.5 करोड़ लगाए हैं, जो फरवरी के बाद सबसे कम मंथली इनफ्लो है। इस साल फरवरी में FII ने इंडियन इक्विटी मार्केट में $22.8 करोड़ लगाए थे। इंडियन मार्केट के आउटपरफॉर्मेंस से उसके वैल्यूएशन को लेकर भी फिक्र होने लगी है। लेकिन फंड मैनेजर्स को नहीं लगता कि आने वाले दिनों में तेज गिरावट आने के आसार बनेंगे।

पिछले 2 महीने से FII इनफ्लो घट गया है। सितंबर और अगस्त में उनका एवरेज इनफ्लो लगभग $86.5 करोड़ रहा है। यह मार्च से जुलाई के बीच पांच महीनों में रहे $2.3 अरब के औसत इनफ्लो का महज एक तिहाई है। इस साल अब तक इंडियन इक्विटी मार्केट में $13.85 अरब का फंड आया है जो इमर्जिंग मार्केट्स में सबसे ज्यादा है।

गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट के फॉर्मर चेयरमैन जिम ओ नील ने इकनॉमिक टाइम्स को हाल में दिए इंटरव्यू में कहा, ‘इनवेस्टर्स अमेरिका फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी सख्ती को लेकर थोड़े फिक्रमंद हो गए हैं। लोगों को लग रहा है कि आने वाले दिनों में मार्केट उथल पुथल से भरपूर रह सकता है और इस बारे में इंडिया कुछ नहीं कर सकता।’

बेंचमार्क इंडेक्स BSE सेंसेक्स की तेजी का दौर सितंबर में थम गया और इसमें 0.1 पर्सेंट की कमजोरी आई। इससे जनवरी 2007 के बाद से मंथली गेंस का सबसे लंबा दौर खत्म हो गया। 8 सितंबर को 27,354 पॉइंट्स का रेकॉर्ड हाई बनाने वाले सेंसेक्स में एक महीने से भी कम समय में ऑल टाइम हाई से 787 प्वाइंट्स यानी 2.9 पर्सेंट की कमजोरी आई है। एनालिस्ट्स के मुताबिक इससे पता चलता है कि मार्केट में घबराहट है। UBS सिक्योरिटीज के इंडिया रिसर्च हेड गौतम छावछड़िया कहते हैं, ‘सरकार के गैस प्राइस हाइक टालने के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के कोल ब्लॉक्स एलोकेशन खारिज करने से FII को कुछ शेयर बेचने की वजह मिल गई।’

हालांकि इस साल BSE सेंसेक्स 26 पर्सेंट मजबूत हुआ है जो 10 टॉप ग्लोबल मार्केट्स में सबसे ज्यादा है। लेकिन इंडियन मार्केट्स के आउटपरफॉर्मेंस से लोगों को लगने लगा है कि इसका वैल्यूएशन ज्यादा हो गया है क्योंकि इकॉनमी और कंपनियों के प्रॉफिट में असल रिकवरी नहीं हुई है। इंडेक्स में उसके एक साल आगे के प्रॉफिट के 16.5 गुना पर ट्रेड हो रहा है। इसके मुकाबले चीन के शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में 9.9 गुना, ब्राजील के आईबोवेस्पा में 11.8 गुना और रूस के MICEX में महज 5.1 गुना पर ही ट्रेड हो रहा है।

अमेरिकी इकनॉमिक ग्रोथ आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है और फेडरल रिजर्व कभी भी इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है लेकिन फंड मैनेजर्स को नहीं लगता है कि इसका इंडिया पर खास असर होगा।

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