महागठबंधन के बिगड़ते रिश्ते, पर अब कांग्रेस ने भी मांगी राजद से कुर्बानी

महागठबंधन के बिगड़ते रिश्ते, पर अब कांग्रेस ने भी मांगी राजद से कुर्बानी

बिहार में महागठबंधन खतरे के निशान पर पहुंच गया है। अब कांग्रेस ने भी राजद से कुर्बानी मांगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पशुपालन मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन के लिए कुर्बानियां दी हैं।

महागठबंधन को बचाने के लिए राजद प्रमुख लालू प्रसाद को भी कुर्बानी देनी चाहिए। महागठबंधन के तीसरे बड़े दल कांग्रेस की ओर से जदयू के स्टैंड से मिलता जुलता बयान आने से राजद पर दबाव बढ़ गया है।

उधर जदयू नेता शरद यादव और समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी जैसे कुछ लोग इस कोशिश में जुटे हैं कि कोई बीच का रास्ता निकाल लिया जाए, लेकिन उनके प्रयास को लेकर न राजद ने उत्साह दिखाया, न जदयू की दिलचस्पी दिखी। सिर्फ जदयू प्रवक्ता संजय सिंह का बयान आया कि राजद ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं, लेकिन जदयू की खिड़कियां खुली हैं।

उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी का नीतीश एवं लालू से अलग-अलग बातचीत का सिलसिला जारी रहा। रविवार को उन्होंने शरद यादव से भी फोन पर बात की। इसके एक दिन पहले दिल्ली में शरद यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की थी। शरद के रिश्ते लालू से भी बेहतर हैं। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद गतिरोध बरकरार है।

हाथ जोड़कर सुलह का निवेदन

अपने पूर्व के स्टैंड से पीछे हटते हुए समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार से महागठबंधन को बचाने का आग्र्रह किया है। लालू के करीबी माने जा रहे शिवानंद ने कहा कि कभी संघमुक्त भारत की बात करने वाले नीतीश से मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि वह लालू से बात करें और बिहार को भाजपा के कब्जे में आने से रोकें। वर्तमान स्थिति से निपटने में सिर्फ नीतीश ही सक्षम हैं। शिवानंद के इस बयान को राजद के स्टैंड से जोड़कर देखा जा रहा है।

बिगड़ते रिश्ते पर हुई चर्चा 

राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के बहाने रविवार को सभी पार्टियों ने अपने-अपने विधायकों के साथ महागठबंधन के बिगड़ते रिश्ते की समीक्षा की। अपने पक्ष के प्रत्याशी को जिताने का संकल्प लिया और साथ ही राजनीतिक कयासों एवं संभावनाओं की पड़ताल की। इसके पहले उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के मुद्दे पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की खामोशी का असर बड़बोले नेताओं पर दिखा। सामान्य तौर पर सुबह से ही शुरू हो जाने वाले राजद-जदयू के नेता-प्रवक्ता रविवार को बोलने से बचते रहे।

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