दिल्ली की तरह बिहार में भी हो सकता है स्मॉग का खतरा, बरतें सावधानी

दिल्ली की तरह बिहार में भी हो सकता है स्मॉग का खतरा, बरतें सावधानी

दिल्ली की तरह बिहार में भी हो सकता है स्मॉग का खतरा, बरतें सावधानीराजधानी में बढ़ रहा #प्रदूषण लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। शहर की हवा में तैर रहे धूलकणों की मात्रा ने सांस की बीमारियों से पीडि़त मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। प्रदूषण से सांस की नलियों में सिकुडऩ की शिकायतें आ रही हैं। खासकर बच्चे तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं।

मानक से ढ़ाई गुणा ज्यादा प्रदूषण

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के प्रवक्ता वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि पटना के वातावरण में मानक से ढाई गुणा ज्यादा प्रदूषण दर्ज किया जा रहा है। सामान्यत: वातावरण में श्वसन योग्य धूलकण की मात्रा 100 माइक्रोन प्रति घनमीटर होती है, लेकिन वर्तमान में राजधानी के वातावरण में इसकी मात्रा 232.46 माइक्रोन प्रति घनमीटर है। वातावरण में धूलकण की मात्रा बढऩे से सांस संबंधी परेशानी हो रही है।

बदलता मौसम भी बना रहा बीमार

पीएमसीएच के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीके चौधरी का कहना है कि प्रदूषण के साथ मौसम में बदलाव के कारण भी सांस संबंधी शिकायतें बढ़ीं हैं। सांस की नली सिकुडऩे से लोग दम फूलने की शिकायत कर रहे हैं। सांस लेने में परेशानी होने से लोगों में बेचैनी की शिकायत भी बढ़ी है। अस्पताल में आने वाले 70 फीसद मरीज सांस संबंधी बीमारी की शिकायत कर रहे हैं।

आरएसवी वायरस कर रहा सपोर्ट

पीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। अभी का तापमान आरएसवी वायरस को सपोर्ट कर रहा है। इस वायरस के कारण बच्चे सांस संबंधी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

धूप निकलने के बाद टहलें

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. लखीन्द्र प्रसाद का कहना है कि अभी ठंड के कारण सूर्योदय से पहले टहलना काफी खतरनाक हो सकता है। खासकर रक्तचाप, मधुमेह एवं दिल के रोगियों को ऐसे मौसम में विशेष सावधान रहने की जरूरत है। धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें। वातावरण में थोड़ी गर्मी आने पर ही टहलना शुरू करें।

बच्चों का रखें विशेष ख्याल

बच्चों को ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर न ले जाएं।

देर रात बच्चे को घर से बाहर ले जाने से परहेज करें।

रात में बच्चों को बाहर ले जाना हो तो पूरा शरीर ढंककर रखें।

रात में सोते समय बच्चों को चादर जरूर ओढ़ाएं।

तीन दिन से ज्यादा बुखार रहने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।

बच्चे की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।

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