जहां जंगल घटे, वहां मलेरिया के मामले बढ़े

जहां जंगल घटे, वहां मलेरिया के मामले बढ़े

शोधकर्ताओं ने विकासशील देशों में जंगलों के घटने और मलेरिया के मामले बढ़ने के बीच संबंध पाया है।

फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द युनाइटेड नेशंस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, करीब 13 करोड़ एकड़ के जगंल (दक्षिण अफ्रीका के बराबर का क्षेत्र) 1990 के बाद से कम हुए हैं।

अमेरिका के पेनसिल्वेनिया के बेस्टलहम में स्थित लीहाई यूनिवर्सिटी से अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता केली ऑस्टिन ने कहा, “वनों का कम होना एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से इसके लिए मानव गतिविधियां जिम्मेदार हैं।”

उन्होंने कहा, “प्राकृतिक वातावरण में मानव-प्रेरित परिवर्तन मलेरिया दर पर एक प्रभावशाली प्रभाव डाल सकता है।”

यह नया शोध 67 प्रतिशत कम विकसित मलेरिया की संभावना वाले क्षेत्रों पर किया गया जो जलवायु परिवर्तन, वनों के कम होने और प्राकृतिक वातावरण में मानव-प्रेरित परिवर्तनों से होने वाले मलेरिया संचरण के सबूत देता है।

वनों का कम होना कुछ क्षेत्रों में सूर्य के प्रकाश बढ़ने और पानी के जमा होने सहित कई कारणों से मलेरिया के प्रसार को प्रभाविक कर सकता है।

यह शोध ‘एआईएमएस एन्वायरमेंटल साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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