सोशल मीडिया से रेल मंत्री तक पहुंचाएं अपनी बात

सोशल मीडिया से रेल मंत्री तक पहुंचाएं अपनी बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने रेल बजट को यात्री सुविधाओं की पटरी पर दौड़ाने के लिए सीधे जनता से सहयोग लेने का फैसला किया है। रेलवे के इतिहास में पहली बार लोग अपने सुझाव-शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। अच्छे विचारों को रेल बजट में शामिल किया जा सकता है। जनता के लिए लोकल सर्किल नामक सोशल मीडिया के जरिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर है।वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते लोकल सर्किल नामक सोशल मीडिया के जरिए रेलवे को बेहतर बनाने का अभियान शुरू किया गया है। इतने कम वक्त में 65,000 से अधिक लोगों ने रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम की खामियां व सुधार करने के विचार पोस्ट किए हैं। जनता की सबसे अधिक शिकायत इस बात की है कि टिकट बुकिंग के समय आईआरसीटीसी की वेबसाइट बहुत धीमी होती है। तत्काल टिकट बुकिंग के लिए वेबसाइट पर लॉगिंन करना असंभव है। ऑनलाइन रिजर्वेशन कराने की प्रक्रिया काफी लंबी है। कई बार टिकट बुकिंग नहीं होने के बावजूद बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं।आईआरसीटीसी का रिफंड सिस्टम खराब होने के कारण बैंक खाते में पैसे आने में काफी समय लगता है। आईआरसीटीसी की टिकट बुकिंग रिवर्जेशन फीस अधिक है। मांग के मुताबिक ट्रेनों में तत्काल कोटा की बर्थ कम है। रेलवे एजेंट तत्काल कोटा की टिकट झटक लेते हैं। पैसेंजर रिजर्वेश सिस्टम (पीआरएस) में विकलांग, बुर्जुग, महिलाओं को लोअर बर्थ के स्थान पर अपर बर्थ दी जाती है। एडवांस तकनीक होने के बावजूद आज भी प्लेटफार्म टिकट स्टेशन काउंटरों पर खरीदने पड़ते हैं। इसे ऑनलाइन नहीं बनाया जा सका।

जनता की मांग
सोशल मीडिया पर आम जनता की शिकायतों के साथ रिजर्वेशन सिस्टम में सुधार की लंबी फेहरिस्त है। जनता ने मांग की है कि भारी मांग को देखते हुए तत्काल कोटा को बढ़ाने की जरूरत है। तत्काल कोटा की टिकट बुकिंग रद्द करने पर रिफंड का प्रावधान पुन: शुरू किया जाना चाहिए। लोगों ने कहा है कि रेलवे एजेंट को टिकट सिस्टम से दूर रखना चाहिए। एजेंटों को तत्काल कोटा की बुकिंग से रोकने की जरूरत है। आईआरसीटीसी की वेबसाइट की क्षमता बढ़ानी चाहिए।

सीटों की ग्राफिक्स दिखे
लोगों की मांग है कि एयरलाइंस की तर्ज पर ऑनलाइन बुकिंग के समय स्क्रीन पर कोच की सीटों की ग्राफिक्स नजर आनी चाहिए। जिससे विकलांग, बुजरुग, महिलाएं, मरीज अपनी पंसद की बर्थ बुक कर सकें। उनके लिए विशेष व्यवस्था का प्रावधान करने की जरूरत है। स्टेशनों पर टिकट बुकिंग काउंटरों की संख्या बढ़ानी चाहिए और रेलवे स्टाफ को अच्छे व्यवहार के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

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