ओड़िशा में कांग्रेस का संकट!

ओड़िशा में कांग्रेस का संकट!

ओड़िशा कभी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का पसंदीदा प्रदेश रहा है। उन्होंने वहां खूब राजनीति की और नियामगिरी में आदिवासियों की मदद करते हुए कई बड़ी परियोजनाएं उन्होंने रूकवा दी। राहुल ने दावा किया था कि वे प्रदेश के आदिवासियों की आवाज बनेंगे। लेकिन पिछले काफी अरसे से नदारद हैं। उन्होंने बीच में एक बार ओड़िशा के नेताओं के साथ बैठक की लेकिन पार्टी संगठन को ठीक करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।

ओड़िशा प्रदेश संगठन में विवाद के कारण ही स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस फिसड्डी रही और भाजपा ने उसे तीसरे स्थान पर धकेल दिया। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कई विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ओड़िशा की 147 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस के 16 और भाजपा के दस विधायक हैं। कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष प्रसाद हरिचंदन को नहीं बदला जाता है तो कम से कम छह विधायक पाला बदल सकते हैं। हालांकि कांग्रेस छोड़ने की तैयारी कर रहे विधायक अभी भाजपा से भी बराबर दूरी रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि चुनाव से पहले वे भाजपा में चले जाएं। भाजपा की बढ़ती ताकत से कांग्रेस के कई विधायकों और नेताओं को लग रहा है कि अगले चुनाव में बीजू जनता दल से लड़ाई भाजपा की होगी। कांग्रेस के नेता इस वजह से भी निराश हैं क्योंकि पार्टी का मौजूदा नेतृत्व सत्तारूढ़ दल से लड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चला रहा है। उनका कहना है कि अगर अब भी राहुल गांधी ध्यान दें और प्रदेश अध्यक्ष बदल कर संगठन को सक्रिय करें तो पार्टी में जान लौट सकती है।

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