सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक को टीएसी की हरी झंडी

सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक को टीएसी की हरी झंडी

सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक को टीएसी की हरी झंडीराज्य सरकार ने #छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) तथा संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) में प्रस्तावित संशोधन को थोड़ा सरल बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत कृषि योग्य जमीन की प्रकृति गैर कृषि जमीन के रूप में परिवर्तित करने तथा इसके बाद गैर कृषि उद्देश्य के लिए ली गई जमीन पर आदिवासियों (रैयतों) का मालिकाना हक बरकरार रहेगा।

गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में झारखंड जनजातीय परामर्शदात्री परिषद (टीएसी) की हुई बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। इस तरह परिवर्तित भूमि पर रैयतों का मालिकाना हक छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 तथा संथाल परना काश्तकारी अधिनियम, 1949 के संगत प्रावधानों के तहत पूर्व की भांति बना रहेगा। अध्यादेश के रूप में लाए जा रहे दोनों अधिनियमों के संशोधन प्रस्ताव में इसका जिक्र नहीं था। अब इसे प्रस्ताव में जोड़ दिया गया है। इससे रैयतों का मालिकाना हक किसी हाल में प्रभावित नहीं होगा।
टीएसी की बैठक में मालिकाना हक का यह प्रावधान सीएनटी एक्ट-1908 की धारा 21 (ख) एसपीटी एक्ट 1949 की धारा-13 (क) में परंतु के रूप में जोडऩे पर सहमति बनी। सरकार इन्हीं दोनों धाराओं में संशोधन कर रही है। बैठक में यह सिंगल एजेंडा था, लेकिन इसमें यह भी सहमति बनी कि दोनों एक्ट के संशोधन अध्यादेश को खत्म कर राज्य सरकार 17 नवंबर से शुरू होने वाली विधानसभा की शीतकालीन सत्र में इसे संशोधन विधेयक के रूप में रखेगी।

बैठक में लिए गए निर्णय के संबंध में अधिकृत जानकारी देते हुए मंत्री लुइस मरांडी, विधायक शिवशंकर उरांव, रामकुमार पाहन तथा लक्ष्मण टुडू ने कहा कि वर्तमान में सीएनटी एक्ट की धारा-49 के तहत उचित मुआवजा देकर उद्योग एवं खनन कार्य के लिए ही आदिवासी जमीन लेने का प्रावधान है। अब इसमें संशोधन से सरकारी उपक्रम व जनहित कार्यों जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, नहर, आंगनबाड़ी केंद्र आदि के लिए भी बाजार दर से चार गुणा अधिक मुआवजा देकर सरकार जमीन ले सकेगी। बैठक में यह भी सहमति बनी कि सरकार ऐसे जनहित कार्यों को पहले अधिसूचित (नोटिफाइड) करेगी। वहीं, मॉल, रेस्टोरेंट, होटल आदि के लिए जमीन नहीं ली जा सकेगी। संशोधन प्रस्ताव से इन्हें हटाने पर सहमति बनी। ऐसे जनहित कार्यों के अंत में ‘आदिÓ शब्द को हटाने का भी निर्णय लिया गया। संशोधन प्रस्ताव के संबंध में यह भी कहा गया कि रैयत गैर कृषि के रूप में परिवर्तित जमीन का उपयोग अन्य कार्यों के लिए स्वयं ही कर सकता है। वह इसे किसी अन्य निजी व्यक्ति या संस्थान को नहीं दे सकता।

बैंक लोन में गारंटर बनेगी सरकार
बैठक में सीएनटी व एसपीटी आच्छादित जमीन पर बैंक से लोन नहीं मिलने का मामला उठा। इसपर सहमति बनी कि सरकार बैंक लोन के लिए स्वयं गारंटर बनेगी। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित होगी जो एक माह के भीतर रिपोर्ट देगी। इसे टीएसी की बैठक में रखा जाएगा।

अब आगे क्या होगा?
– टीएसी की बैठक में लिए गए निर्णय पर राज्यपाल की स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद इसे संशोधन प्रस्ताव में जोड़ा जाएगा।
-इसपर कैबिनेट की स्वीकृति ली जाएगी।
-कैबिनेट की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव को संशोधन विधेयक के रूप में विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।
-अभी तक सरकार इस संशोधन को अध्यादेश के रूप में ला रही थी।

बैठक में ये थे उपस्थित
पदेन अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री रघुवर दास, पदेन उपाध्यक्ष के रूप में मंत्री लुइस मरांडी तथा सदस्य के रूप में विधायक विमला प्रधान, गंगोत्री कुजूर, हरिकृष्ण सिंह, लक्ष्मण टुडू, रामकुमार पाहन, मेनका सरदार, शिवशंकर उरांव, पूर्व गृह सचिव जेबी तुबिद एवं सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की। इनके अलावा मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, विकास आयुक्त अमित खरे, कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पाण्डेय तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन।

बिरूआ व जोबा ने किया बहिष्कार
झामुमो विधायक दीपक बिरूआ व जोबा मांझी बैठक में उपस्थित तो हुए, लेकिन जैसे ही बैठक शुरू हुई वे उसका बहिष्कार करते हुए बाहर निकल गए। इनका कहना था कि सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन कर रही है।

बैठक से नदारद रहे मंत्री-विधायक
मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, भाजपा विधायक ताला मरांडी, आजसू विधायक विकास कुमार मुंडा, विधायक एनोस एक्का व गीता कोड़ा।

किसने क्या कहा?
– सीएनटी तथा एसपीटी की मूल भावना से छेड़छाड़ नहीं किया जा रहा है। कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदलने पर भी रैयतों का मालिकाना हक बरकरार रहेगा।

लुइस मरांडी, मंत्री, कल्याण विभाग सह उपाध्यक्ष-टीएससी
– संशोधन के लिए पहले जो अध्यादेश लाया जा रहा था उसमें मालिकाना हक संबंधित पार्ट नहीं था। अब इसे जोड़ दिया गया है। संशोधन से रैयत कृषि भूमि का उपयोग गैर कृषि कार्य में कर सकेंगे।
शिवशंकर उरांव, टीएसी सदस्य सह भाजपा विधायक

– विपक्ष का यह आरोप गलत है कि सरकार उद्योगपतियों को जमीन देने के लिए यह संशोधन कर रही है। यह संशोधन रैयतों तथा वहां के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर ही किया जा रहा है।
-रामकुमार पाहन, टीएसी सदस्य सह भाजपा विधायक।

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