मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जुबान फिर फिसल गई

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जुबान फिर फिसल गई
9641_jitan
मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जुबान फिर फिसल गई। मुख्यमंत्री ने विकास मित्रों से कहा-खुद खाओ, पर दूसरे को मत खिलाओ और विकास पर ध्यान दो। मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके। कहा-कई तरह की योजनाओं का पैसा जनता के अकाउंट में सीधे जाता है। इसलिए महिलाओं के अकाउंट खोलने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि महिलाएं घर की समस्याओं से रूबरू होती रहती हैं। मर्दों के अकाउंट में पैसा डालने पर वो दारू में उड़ा देते हैं और घर की स्थिति बदतर ही रह जाती है। मांझी बुधवार को बनमनखी में नागरिक अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे।
‘दारू को दवा के रूप में पिएं’
बीते रविवार को ही दानापुर में महादलितों के बीच बासगीत का पर्चा बांटने आए सीएम जीतन राम मांझी ने समुदाय के लोगों से कहा था कि दारू को दवा के रूप में पिएं। नशे के कारण महादलित लोग न तो अपने बच्चों का ध्यान रख पाते हैं, न ही जीवन को बेहतर कर पाते हैं। पीना ही है तो शराब को दवा के रूप में थोड़ी-थोड़ी पियो। रूपसपुर नहर स्थित चुल्हाईचक मुसहरी में दलित अधिकार मंच द्वारा आयोजित समारोह में सीएम ने कहा था कि वंचित वर्ग के लोगों को अन्य तबकों से सबक लेते हुए आगे बढ़ना होगा।
‘चूहा खाना खराब बात नहीं’
इससे कुछ दिनों पूर्व ही सीएम की जुबान एक बार फिर लड़खड़ाई थी और उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के चूहा खाकर जिंदा रहने की खबर पर कहा था, ‘चूहा मारकर खाना खराब बात नहीं है। मैं भी चूहा खाता था। आज भी मिल जाए तो परहेज नहीं है।’ विपक्ष ने जीतन के इस बयान की अालोचना की। विपक्ष का कहना था कि बाढ़ प्रभावितों को मजबूरी में चूहे खाने पड़ रहे हैं। इसलिए जीतन का बयान असंवेदनशील है। दरअसल, जीतन मुसहर जाति से ताल्लुक रखते हैं। इस तबके के लोग आज भी चूहे खाते हैं।

You must be logged in to post a comment Login