2100 तक विश्व के तीन-चौथाई हिस्से पर पड़ेगी भयावह लू की मार’

2100 तक विश्व के तीन-चौथाई हिस्से पर पड़ेगी भयावह लू की मार’

एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर कार्बन गैस उत्सर्जन में वृद्धि वर्तमान दर पर जारी रही, तो वर्ष 2100 तक दुनिया की आबादी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा लू के घातक थपेड़ों से प्रभावित हो जाएगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में दुनिया का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा लू की मार झेल रहा है।

‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ जरनल में प्रकाशित इस शोध में बताया गया कि अगर गैस उत्सर्जन काफी कम हो जाता है, तो भी लू के थपेड़े दुनिया की मानव आबादी के 48 प्रतिशत को प्रभावित कर सकते हैं।

अमेरिका के मनोआ की हवाई यूनिवर्सिटी में भूगोल के सहायक प्रोफेसर और इस शोध के प्रमुख कामिलो मोरा ने कहा, “हमारे भविष्य के लिए तेजी से विकल्प खोते जा रहे हैं। हमारे लिए लू के थपेड़ों के मामले में दो ही स्थिति है, एक तो बहुत बुरी या फिर भयावह। विश्व भर में बड़ी आबादी इससे प्रभावित है और माना जा रहा है कि इसका प्रभाव जारी रहेगा लेकिन अगर उत्सर्जन कम नहीं हुआ, तो ये स्थिति और भी बुरी होगी।”

मानव शरीर 37 डिग्री सेल्सियस के तापमान के आसपास बेहतर रूप से काम कर सकता है।

मोरा ने कहा, “लू के थपेड़े मानव जीवन के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं, क्योंकि गर्म मौसम उच्च आद्र्रता के साथ बढ़ता है और इससे शरीर का तापमान भी बढ़ता है। शरीर के तापमान के बढ़ने से लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है।”

मोरा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने व्यापक रूप से की गई समीक्षा में इस प्रकार के करीब 1,900 मामले दर्ज किए। ये मामले उन क्षेत्रों के थे, जहां लू के थपेड़ों के कारण 1980 से लोगों की मौत हुई है।

उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन ने मानवता को ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को अधिक गंभीरता से नहीं लिया गया, तो लोगों का जीवन और भी खतरनाक तथा मुश्किल हो जाएगा।”

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