60 साल बाद बना गुरु-शनि का संयोग

60 साल बाद बना गुरु-शनि का संयोग

Diwali

कल, 23 अक्टूबर को दीपावली पर 60 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि न्यायाधिपति शनि और देव गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में रहेंगे। इस दिन 9 ग्रहों में 7 ग्रह अनुकूल होंगे। ज्योतिषविदों की मानें तो ये दिन लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला दिन होगा। इस दिन खरीदारी भी शुभ रहेगी। इस तरह के उच्च का संयोग दुबारा 616 साल बाद बनेगा। गुरु एवं शनि के उच्च राशि में रहते हुए दीपावली का ये योग 1954 में बना था। उस समय मंगल भी मकर राशि में उच्च का था।

पूजा का मुहूर्त

माता लक्ष्मी कुबेर की पूजा स्थिर लग्न में शुभकारी मानी जाती है। सुबह 7.55 बजे से लेकर मध्य रात्रि बाद तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। मान्यता है कि इस लग्न में पूजा करने से धन स्थिर रहता है। हालांकि कई राज्यों में चौघड़िया मुहूर्त में पूजा करने का ज्यादा चलन है।

राशि के अनुसार समय

मेष: शाम 6 से रात 8 बजे तक

वृष : रात 8 से 9 बजे तक

मीन : शाम 4 से 5.28 बजे तक

कुंभ : दोपहर 2.28 से 3.59 बजे तक

मकर : दोपहर 12.42 से 2.28 बजे तक

धनु : सुबह 9.35 से दोपहर 12.10 बजे तक

वृश्चिक : सुबह 8 से 10.35 बजे तक

कन्या : दोपहर 3 से शाम 5.59 बजे तक

तुला : शाम 6 से रात 8 बजे तक

मिथुन : रात 9 से 11 बजे तक

कर्क : रात 11 से 1 बजे तक

सिंह : रात 1.28 से 3.44 बजे तक

 

स्थिर लग्न 

सुबह7.55 से लेकर 10.55 बजे तक वृश्चिक लग्न

दिन में 2.02 से 3.33 बजे तक कुंभ लग्न

शाम 6.41 बजे से रात 8.37 बजे तक वृष लग्न

रात 1.08 से 3.22 बजे तक सिंह लग्न

सिंह लग्न में पूजा करनेवाले ध्यान रखें कि अमावस्या रात 2.39 बजे तक ही है।

चौघड़िया मुहूर्त

सुबह 6.14 से लेकर 7.55 बजे तक शुभ का

10.08 से लेकर 11.33 बजे तक चर का

11.33 से 12.59 बजे तक लाभ का

दोपहर 12.59 से 2.24 बजे तक अमृत का

3.49 से 5.17 बजे तक शुभ का

रात 8.06 से 9.31 बजे तक चर का

  • से57 बजे तक लाभ का

10.57 बजे से 12.22 बजे तक अमृत का

1.57 बजे से 3.12 बजे तक शुभ का।

You must be logged in to post a comment Login