सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे का कायाकल्प करने के प्रयास तेज

सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे का कायाकल्प करने के प्रयास तेज

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेलवे का कायाकल्प करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। रेलवे में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को रेल भवन में देश-विदेश की पांच दर्जन से अधिक दिग्गज कंपनियों के साथ बैठक की। रेल मंत्री ने कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को आश्वस्त किया है कि एफडीआई और पीपीपी मॉडल संबंधी नीतियों को जरुरत पड़ने पर और लचीला बनाया जाएगा, जिससे निवेशकों को अड़चने नहीं आएंगी।

रेल भवन में आयोजित निवेशकों के सम्मेलन में प्रभु ने सवा सौ सीईओ के समक्ष रेल मंत्रालय की कार्य योजना को पेश किया। इसमें प्रमुख रूप से बुलेट ट्रेन, सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर, उपनगरीय सेवा कॉरिडोर (लोकल ट्रेन), माल ढुलाई के लिए समर्पित रेल लाइनें, रेलवे विद्युतीकरण, आधुनिक सिग्लन सिस्टम, फेट्र टर्मिनल, यात्री स्टेशन आदि परियोजनाओं के बारे में बताया गया। रेलवे ने कुल नौ क्षेत्रों में 100 फीसदी एफडीआई व पीपीपी मॉडल में निवेश के बारे में बताया गया।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि बैठक में रिलायंस, अदानी पोर्ट्स, एल एंड टी सहित तमाम विदेशी कंपनियां शामिल थीं। उन्होंने कहा, रेलवे में एफडीआई व पीपीपी मॉडल में निवेश के मकसद से सरकार ने पहली बैठक बुलाई है। इसके बाद दो बैठकें जनवरी व फरवरी में आयोजित की जाएंगी। भारत में निवेश करने वाले देशों के भारतीय दूतावासों को सरकार पत्र लिखेगी। जिससे वहां की बड़ी कंपनियों को होने वाली बैठक में आमंत्रित किया जा सके।
इसके अलावा रेलवे में निवेश को बढ़ावा देने के लिए जापान, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, कोरिया आदि देशों में रोड शो करेगी। रेल मंत्री ने निवेशकों का आह्वान किया कि आगे तीन चार साल में रेलवे का चाल व चेहरा बदलने के लिए आगे आएं। उन्होंने कंपनियों को भरोसा दिया कि रेलवे में बुनियादी ढांचा व सेवाओं में निजी निवेश को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा। ट्रेन परिचालन पूर्ण रूप से रेलवे के हाथ में रहेगा। केवल नई परियोजनाएं में निवेशकों को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे।

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