सर्दियों में डैंड्रफ से पाएं छुटाकारा, अपनाएं ये हर्बल नुस्खे

सर्दियों में डैंड्रफ से पाएं छुटाकारा, अपनाएं ये हर्बल नुस्खे

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मौसम के बदलते मिजाज का सीधा असर आपके शरीर पर देखा जा सकता है। जहां चेहरा गर्मियों में झुलसने लगता है, ठंड में त्वचा रूखी हो जाती है। बरसात और नमी होने की दशा में भी शरीर में मौसम अनुरूप परिवर्तनों का दिखना आम बात है, लेकिन सुदूर ग्रामीण अंचलों में बसे आदिवासी आज भी सदियों पुराने हर्बल नुस्खों को अपनाकर अपने शारीरिक सौंदर्य और सेहत को बनाए रखते हैं। आपके व्यक्तित्व में निखार के लिए आपके सिर के बालों का महत्वपूर्ण योगदान है। मौसम की मार अक्सर बालों पर भी पड़ती है और ऐसे में डैंड्रफ होना, बालों का झड़ना, कमजोर होना जैसी समस्याएं अक्सर देखी जा सकती हैं। चलिए आज जानते हैं बालों की बेहतर सेहत से जुड़े आदिवासियों के पारंपरिक हर्बल नुस्खों की।

बालों से जुड़ी समस्याओं और उनके निवारण के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डाँग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहें हैं।

1. बदलते मौसम के चलते बालों में होने वाली रूसियों (डैंड्रफ) के नियंत्रण के लिए आदिवासी हर्बल जानकार निंबोलियों (नीम के फल) और करंज के बीजों का उपयोग करते हैं। निंबोलियों और करंज के बीजों की समान मात्रा लेकर कुचल लिया जाए और चूर्ण तैयार किया जाए, नहाने से पहले इस चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा लेकर थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाए और बालों पर प्रतिदिन लगाया जाए। कुछ ही दिनों में बालों से डेंड्रफ की छुट्टी हो जाएगी।

2.गुजरात में आदिवासी नीम के बीजों के तेल को रात में बालों में लगाते हैं और सुबह इसे धो लिया जाता है। सप्ताह में इस तेल से बालों पर कम से कम 2 बाल मालिश करने की भी सलाह दी जाती है। पातालकोट (मध्यप्रदेश) के हर्बल जानकार नारियल के तेल में नीम के बीजों को उबालते हैं और इस तेल से सप्ताह में दो बार मालिश करने की सलाह देते हैं।

3.कुसुम के बीजों का चूर्ण और बबूल की छाल का चूर्ण, दोनों समान मात्रा में लेकर तवे पर भून लिया जाता है। जलने की वजह से राख जैसा मिश्रण तैयार हो जाता है, इस मिश्रण को नारियल या मोगरा के तेल के साथ मिलाकार सिर पर मालिश किया जाए तो बालों की वृद्दि तेजी से होती है और यही फार्मूला गंजापन भी रोकने में मदद करता है।

4- गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार इंद्रायण नामक पौधे की जड़ों को गौ-मूत्र में कुचलते हैं और सिर पर लगाते हैं। इनके अनुसार प्रतिदिन ऐसा करने से गंजापन नहीं आता और बालों की जड़ों को मजबूती भी मिलती है।

5- बालों पर नारियल का ताजा पानी लगाकर हल्की हल्की मालिश करने से बालों का रूखापन दूर होता है और इनके झड़ने का सिलसिला कम हो जाता है। कई इलाकों में ताजे हरे नारियल के फल से निकाली गई मलाई को भी बालों पर हल्का हल्का रगड़कर मालिश करने की सलाह आदिवासी देते हैं। माना जाता है कि इन दोनो युक्तियों को अपनाने से बालों की सेहत बेहतर हो जाती है।

6- आंवले के फलों का चूर्ण लिया जाए और इसमें एक टमाटर कुचल कर मिला जाए, इन दोनों को अच्छी तरह से मिलाकर सिर पर लगाकर 20 मिनट तक मालिश किया जाए तो बालों से डैंड्रफ दूर हो जाते हैं। ऐसा सप्ताह में कम से कम एक बार अवश्य करना चाहिए।

7- बालों की बेहतर सेहत और घने बनाने के लिए शंखपुष्पी के ताजे पौधों को सुखा लिया जाए और चूर्ण तैयार किया जाए। इस चूर्ण को नारियल तेल में डालकर मध्यम आंच पर 20-25 मिनिट तक गर्म किया जाए। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर बालों पर लगाया जाए, यह बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है और इन्हें घना भी करता है।

8-गुड़हल के ताजे लाल फूलों को हथेली में कुचल लिया जाए और इस रस को नहाने के दौरान बालों पर हल्का हल्का रगड़ा जाए, गुड़हल एक बेहतरीन कंडीशनर की तरह कार्य करता है।

9-पातालकोट में आदिवासी अनंतमूल की चाय तैयार करते हैं, माना जाता है कि बालों की बेहतर सेहत के लिए यह चाय बड़ी कारगर है। इस चाय को तैयार करने के लिए अनंतमूल की जड़ों के साथ कुछ मात्रा में सेमल की छाल भी मिला दी जाती है और इसे पानी में डालकर खौलाया जाता है। ठंडा होने पर इसे छान लिया जाता है और पी लिया जाता है। माना जाता है कि यह फार्मुला बालों की सेहत बेहतर करता है और साथ ही बालों का असमय पकना भी रोकता है।

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