सरकार का विश्वासमत प्रस्ताव,फडणवीस रहेंगे या जाएंगे, फैसला आज

सरकार का विश्वासमत प्रस्ताव,फडणवीस रहेंगे या जाएंगे, फैसला आज

Devendra

शिवसेना के साथ गतिरोध बरकरार रहने के बीच महाराष्ट्र में 13 दिन पुरानी देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार आज विश्वासमत प्रस्ताव पेश करेगी जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)की मदद से जीत मिलने की संभावना है। वहीं मंगलवार को उद्धव ठाकरे की शिवसेना विधायकों से हुई मीटिंग ने मुंबई में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।विधायकों के साथ हुई यह मीटिंग एक घंटे से भी ज्यादा देर तक चली। मीटिंग के बाद उद्धव ने वहां इंतजार कर रहे पत्रकारों से कोई बात नहीं की। शिवसेना के सूत्रों ने बताया कि उद्धव ने अपने विधायकों से कहा है कि वे विधान भवन में बुधवार की सुबह 9 बजे उपस्थित रहें।कभी एक दूसरे की साथी रही बीजेपी और शिवसेना ने विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें खींच ली हैं और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपने उम्मीदवार भी खड़े कर दिए हैं। इनके अलावा कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवारा उतारा है जिसकी वजह से विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए हरिभाउ बागड़े को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिवसेना ने विजय औती तथा कांग्रेस ने वर्षा गायकवाड़ को उम्मीदवार घोषित किया है।बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना ने नेता प्रतिपक्ष के लिए भी अपना दावा पेश किया है, हालांकि उसने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि सदन में विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान के दौरान उसका क्या रुख होगा। शरद पवार की 41 विधायकों वाली एनसीपी ने पहले ही अल्पमत सरकार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। फिलहाल 287 सदस्यीय सदन में बीजेपी के 121 सदस्य हैं तथा उसने 7 निर्दलीय एवं बहुजन विकास आघाड़ी के 3 विधायकों एवं अन्य के समर्थन का दावा किया है।बुधवार को यदि एनसीपी विश्वासमत को सीधा समर्थन करती है, तो बीजेपी को किसी बाहरी समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर एनसीपी मतदान में हिस्सा न लेने का ‘पिछला रास्ता’ चुनती है, तब भी 3-4 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। निर्दलीय और छोटे दलों के 9 विधायकों का पक्का समर्थन बीजेपी के काम को आसान बना देगा। वहीं एनसीपी नेता शरद पवार ने यह सस्पेंस कायम रखा है कि वे इसमें कौन सा रास्ता चुनेंगे। उन्होंने प्रेस को बताया कि विश्वासमत वाले दिन इसका फैसला होगा। हालांकि दोनों ही स्थितियों में बुधवार का टेस्ट उतना मुश्किल नहीं जान पड़ता।

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