अगर दिल्ली में उसकी सरकार बनीं तो बिजली की दरें 50 फीसद तक कम : आप

अगर दिल्ली में उसकी सरकार बनीं तो बिजली की दरें 50 फीसद तक कम : आप

         AAP- Yogendra Yadav

बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ मोर्चा खोले आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा है कि जनता के गुस्से ने बिजली दरों में बढ़ोतरी की अनुचित घोषणा को वापस लेने पर सरकार को मजबूर कर दिया। पार्टी का कहना है कि सरकार के इस यू टर्न से यह भी पता चलता है कि भाजपा की केंद्र सरकार और डीईआरसी की साजिश के चलते यह गैर जरूरी बढ़ोत्तरी की गई थी, जो नाकाम हो गई। पार्टी ने कहा है कि अगर दिल्ली में उसकी सरकार बनीं तो बिजली की दरें 50 फीसद तक कम की जाएंगी।

आप नेता योगेंद्र यादव ने एक शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया है कि ईंधन अधिभार के नाम पर बिजली की दरों में बढ़ोतरी की यह घोषणा कुछ और नहीं बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश थी। पार्टी ने यह भी कहा है कि अगर वह सत्ता में आई तो बिजली की दरें आधी कर दी जाएंगी। आप नेता कहा कि उनकी पार्टी लगातार इस बात पर बल देती रही है कि दिल्ली में बिजली की दरों में तब तक किसी तरह की तब्दीली नहीं होनी चाहिए जब तक इन कंपनियों के खातों की छानबीन नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) पूरी नहीं कर लेते हैं।

आप ने कहा है कि 24 घंटे के भीतर दिल्ली विद्युत नियामक आयोग की ओर से बिजली की दरों में इजाफे की घोषणा को वापस लेने पर इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और डीईआरसी की बेईमानी झलकती है। डीईआरसी के यू-टर्न ने साबित कर दिया कि भाजपा की केंद्र सरकार इसकी स्वायत्तता को रौंदने का काम कर रही है। बेपरवाह दिल्ली प्रशासन निजी बिजली वितरण कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए दिल्ली की जनता पर गैर जरूरी बोझ लादने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने बिजली वितरण कंपनियों की लेखा जांच में हो रही ढिलाई पर भी ध्यान खींचा है। आप नेता ने कहा कि पूरे घटनाक्रम से डीईआरसी की भूमिका पर सवाल उठते हैं कि एक स्वतंत्र बिजली वितरण नियामक होने के बावजूद डीईआरसी भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। जनता के गुस्से की वजह से उसे यह फैसला जल्दीबाजी में वापस लेना पड़ा।

उन्होंने कहा कि यह तथ्य भी चौंकाने वाला है कि पिछले छह महीने से पिछले दरवाजे से दिल्ली पर राज कर रही भाजपा ने बिजली वितरण कंपनियों की कैग से लेखा परीक्षा कराए जाने पर एक अजब ही रुख अख्तियार कर रखा है। पिछली कांग्रेस सरकार की माफिक भाजपा ने भी बिजली वितरण कंपनियों को दिल्ली के लोगों को लूटने की पूरी आजादी दे दी है। अब डीईआरसी को दिल्ली के लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि आखिर उसने पूरा नाटक क्यों किया। आखिर गुरुवार को किस कारण बिजली की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की गई और क्यों वापस ले लिया गया। आप नेता ने पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि यह घोषणा वितरण कंपनियों को मदद करने के इरादे की गई थी? क्या केंद्र सरकार साबित कर सकती है कि वह इसके विरोध में थी? क्या दिल्ली प्रशासन ने डीईआरसी को विरोध पत्र दिया है?

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता से अपील की कि वह इस गैरजिम्मेदार दिल्ली प्रशासन की ओर से जारी इस तरह के अनुचित प्रयासों के खिलाफ लगातार विरोध जारी रखे। आप ने दिल्ली की जनता से वादा किया है कि दिल्ली की सत्ता में आने के बाद पार्टी बिजली दरों में 50 फीसद तक की कटौती करेगी।

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