लद्दाख घुसपैठ के बाद अब चीनी सेना ने हिंद महासागर में बढ़ाया दखल

लद्दाख घुसपैठ के बाद अब चीनी सेना ने हिंद महासागर में बढ़ाया दखल

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चीन केवल लद्दाख में ही घुसपैठ नहीं कर रहा है बल्कि हिंद महासागर में भी उसका बढ़ता दखल देखा जा रहा है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी-नेवी की एक पनडुब्बी ने इस माह की शुरूआत में कोलंबो में लंगर डाला था। इससे पहले भारतीय जल सेना कई बार चीन के युद्धपोत और पनडुब्बियों को ट्रैक कर चुकी है, लेकिन यह पहला मौका है जब चीन इतनी दूर पहुंचा है।
चीन की नेवी खुद को तेजी से “ग्रीन वॉटर फोर्स” से “ब्लू वॉटर फोर्स” में तब्दील कर रही है, यानी कि वह किनारों के पानी से निकलकर गहरे समंदर में अपनी पहुंच बना रही है। यह पहली बार है जब चीन की पनडुब्बी इस बार खुलकर उस जगह पर आई जिसे भारत अपना “महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाना” मानता है।
7 से 14 सितंबर तक चीन की डीजल-इलेक्ट्रिक टाइप 039 “सॉन्ग क्लास” पनडुब्बी कोलंबो इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल पर रूकी रही थी। इस बारे में चीनी सरकार ने कहा कि उसकी यह पनडुब्बी अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं के खिलाफ अभियान चलाने जा रही थी और बीच में ईधन भरवाने के लिए रूकी थी। चीन के मुताबिक ऎसा दुनिया भर के देश करते हैं और इसमें कोई नई बात नहीं है।
भारतीय नेवी के चीफ ऎडमिरल रॉबिन धवन ने कहा था, “हम लगातार उन पर नजर रखते हैं। हम देखते हैं कि कहां से वे चले और क्या खतरा हो सकता है। हिंद महासागर हमारा इलाका है। हमारे युद्धपोत, पनडुब्बियां और एयरक्राफ्ट किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।”
वहीं सूत्रों की मानें तो चीन के मुकाबले भारत की जल सेना कमजोर है। भारत के पास केवल 13 पुरानी डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से करीब आधी ही एक वक्त पर एक्टिव रहती हैं। इसके अलावा एक न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी है। वहीं चीन के पास 51 साधारण और 5 न्यूक्लियर पनडुब्बियां हैं। यह जल्द ही 5 और जेआईएन क्लास न्यूक्लियर पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल करने जा रहा है।

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