रेशम की तरह मेरे पुत्र को भी काट डालो तो तनिक भी मलाल नहीं होगा : आरोपी अभिषेक की मां सुशीला देवी

रेशम की तरह मेरे पुत्र को भी काट डालो तो तनिक भी मलाल नहीं होगा : आरोपी अभिषेक की मां सुशीला देवी

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रेशम की नृशंस हत्या से आक्रोशित वारसलीगंज मोहल्ले के लोग और छात्र के परिजनों ने गुरुवार को जेएलएनएमसीएच पर हमला बोल दिया. सारे लोग आरोपी अभिषेक को मार डालने पर आमादा थे. पुलिस की हिरासत में अभिषेक का इलाज चल रहा है.
आक्रोशित लोगों ने आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ाने का प्रयास किया. पुलिस ने सख्ती बरती तो आक्रोशित लोगों ने बरारी थानेदार रंजन कुमार, अभिषेक की सुरक्षा में तैनात सिपाहियों से धक्का-मुक्की और नोक-झोंक की. सबकी यही मांग थी कि हत्यारे अभिषेक को हमलोग सजा देंगे, इसलिए पुलिस उसे हमलोगों को सौंप दे.
इस बात पर परिजन और मोहल्ले के लोग अड़े थे. वे रेशम की लाश का पोस्टमार्टम भी नहीं कराना चाह रहे थे. परिजनों का कहना था कि जैसे अभिषेक ने रेशम को काट डाला है, उसी तरह हमलोग अभिषेक को काट देंगे. इमरजेंसी में भरती अभिषेक पर भी हमले का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस की सूझबूझ के कारण अभिषेक की जान बच गयी.इमरजेंसी का गेट तोड़ने का प्रयासअभिषेक पर हमले की आशंका घटना के बाद से ही जतायी जा रही थी, इसलिए बबरगंज और बरारी पुलिस चौकस थी. पुलिस की मौजूदगी में अभिषेक का इलाज चल रहा था. सुबह में उसे अल्ट्रासोनोग्राफी के लिए ले जाया गया. उसी दौरान 50-60 की संख्या में लोग इमरजेंसी में घुस गये और अभिषेक को लेकर भागने का प्रयास करने लगे. मौके पर तैनात पुलिस ने अभिषेक को बचाया. घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत बरारी थानेदार रंजन कुमार अस्पताल पहुंचे. उन्होंने इमरजेंसी से सारे लोगों को बाहर निकाला और दोनों ओर का दरवाजा बंद कर दिया. लेकिन आक्रोशित लोग मानने को तैयार नहीं थे. वे दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसने का प्रयास कर रहे थे.

जेएलएनएमसीएच में साढ़े तीन घंटे तक चला हंगामा, लाश रख मुख्य गेट को किया जामपरिजनों ने रेशम की लाश को जेएलएनएमसीएच के मुख्य गेट पर रख जाम कर दिया. इससे कोई वाहन, एंबुलेंस अस्पताल में प्रवेश नहीं कर पा रहे थे. अस्पताल में हंगामा की सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर विजय कुमार, मनोरंजन भारती, बरारी थानेदार रंजन कुमार, बबरगंज थानेदार महेश्वर प्रसाद राय, आदमपुर थानेदार इंद्रदेव पासवान, तिलकामांझी थानेदार नीरज कुमार, जीरोमाइल थानेदार उत्तम कुमार समेत पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल और अफसर को बुला लिया गया. पूरा अस्पताल परिसर क्षण भर में ही पुलिस छावनी में तब्दील हो गया. पुलिस अधिकारी रेशम की लाश को वहां से उठा कर पोस्टमार्टम कराने की बात कह रहे थे, लेकिन परिजनों की एक ही जिद थी कि पुलिस लिखित दे कि कब अभिषेक को सजा मिलेगी. सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर साढ़े बारह बजे तक अस्पताल में हंगामा होता रहा. अंतत: सिटी एएसपी वीणा कुमारी व एसडीओ सुनील कुमार अस्पताल पहुंचे. एएसपी ने परिजनों से बात की. एएएसपी के आश्वासन के बाद परिजन मान गये और लाश को वहां से हटाया. इसके बाद लाश का पोस्टमार्टम हुआ.कैदी वार्ड में किया शिफ्ट. अभिषेक की जान को खतरा देख पुलिस ने आनन-फानन में उसे इमरजेंसी से सजर्री वार्ड में शिफ्ट कर दिया. लेकिन वहां शीशे का खिड़की तोड़ कर लोग वार्ड में घुसने का प्रयास कर रहे थे. अभिषेक को चार पुलिसकर्मियों ने उठाया और उसे सीधे कैदी वार्ड ले गये. एक कमरे में अभिषेक को रख बाहर से दरवाजा बंद कर दिया गया. भीतर चार पुलिसकर्मी और बाहर 10 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया. अभिषेक को सुरक्षित स्थान में पहुंचाने के बाद  कुछ लोग पूरे अस्पताल में अभिषेक को पागलों की तरह खोज रहे थे. वार्डो में घूम-घूम कर अभिषेक की खोज की जा रही थी, ताकि  उसे बेड पर काट दिया जाये. किसी को यह भनक नहीं लगी की कैदी वार्ड की भारी सुरक्षा में अभिषेक को रखा गया है. अभिषेक के नहीं मिलने पर लोगों ने कहा कि पुलिस ने अभिषेक को भगा दिया है. इस कारण लोगों ने अस्पताल का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया, ताकि कोई मरीज को बाहर नहीं ले जा सके.

देखिये भैया, बेटी को कैसे काटा

रेशम के जख्म उसकी नृशंस हत्या की कहानी बयां कर रहे थे. जो कोई रेशम के शरीर के जख्म को देखता आरोपी अभिषेक को कोसता और कहता कि उसे भी इसी तरह काट दिया जाये. पिता रणजीत साह अस्पताल पहुंचने वाले हर शख्स को  रेशम के शरीर का जख्म दिखा रहे थे.

पिता ने कहा कि अगर अभिषेक मेरी बेटी से प्यार करता था तो उसे काटा क्यों. रेशम अगर प्रेम विवाह कर भाग जाती तो भी मुङो कोई मलाल नहीं रहता. आखिर वह जीवित तो रहती, लेकिन अभिषेक ने तो उसे मार डाला. आज मेरी बेटी के साथ इस तरह की घटना घटी है, कल किसी दूसरी रेशम के साथ ऐसी घटना न हो, इसलिए अभिषेक को तुरंत सजा मिले. पुलिस यह लिखित आश्वासन दे कि आखिर कितने दिनों के भीतर अभिषेक को सजा मिलेगी.

अभिषेक को भी काट डालो : सोनीरेशम की मां सोनी देवी ने कहा कि मेरी बेटी का हत्यारा अभिषेक को भी काट डालो, ताकि  फिर किसी लड़की के साथ ऐसा नहीं कर सके. रेशम भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी. वह पढ़-लिख कर सरकारी नौकरी करना चाहती थी. लेकिन उसका सपना अब पूरा नहीं हो पायेगा. बेटी का जख्म बार-बार देख मां अस्पताल में मूर्छित हो रही थी.

शिवम ने दी मुखाग्निबरारी गंगा घाट पर रेशम का दाह-संस्कार कर दिया गया. उसके छोटे भाई शिवम ने मुखाग्नि दी. अंतिम संस्कार के दौरान रंजीत के कई रिश्तेदार, स्वर्णकार समाज के लोग मौजूद थे.

स्कूल नहीं जाती थी रेशमसरयू देवी मोहनलाल मध्य विद्यालय में एडमिशन कराने के बाद रेशम कभी स्कूल नहीं गयी. बुधवार को हुई घटना से एक दिन पहले स्कूल गयी थी. घटना के दिन स्कूल नहीं, बल्कि कोचिंग गयी थी. स्कूल नहीं जाने के बाबत यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि रेशम के माता-पिता को इस बात की जानकारी थी कि रास्ते में उसके साथ छेड़छाड़ होती थी. रेशम की सरयू देवी मोहनलाल मध्य विद्यालय की आठवीं कक्षा की क्लास टीचर ललिता रानी ने बताया कि रेशम एडमिशन कराने के बाद स्कूल नहीं आती थी. दो दिन पहले मंगलवार को स्कूल आयी थी. उससे स्कूल नहीं आने का कारण पूछा गया, तो रेशम का कहना था कि वह नानी के घर गयी हुई थी. इसी कारण स्कूल नहीं आ रही थी. मोहल्ले के कुछ लोगों ने भी बताया कि उसके अभिभावकों ने स्कूल जाने से रोक रखा था.

फांसी भी मिले, तो गम नहीं है : अभिषेक

भागलपुर: रेशम की हत्या का आरोपी अभिषेक अपना सारा जुल्म कबूल कर रहा है. उसने कहा कि पूरे होश में रेशम की हत्या उसने की. वह रेशम से प्यार करता था, लेकिन कभी भी रेशम की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. फोन किया, दर्जनों प्रेम-पत्र लिखा, फिर भी रेशम की ना से अभिषेक आक्रोशित हो गया और उसकी हत्या कर डाला.  उसने कहा कि अगर उसे इस हत्या के लिए फांसी की भी सजा मिलती है, तो गम नहीं होगा. फांसी से भी बड़ी अगर कोई सजा है तो उसके लिए भी वह तैयार है.

100 रुपये में खरीदा चाकूअभिषेक ने कहा कि रेशम की हत्या का ताना-बाना पहले ही तैयार कर लिया था. बुधवार को ही लोहापट्टी से 100 रुपये में दो धारदार चाकू खरीदा. फिर घर आया. वहां नहा-धोकर भगवान की पूजा की और माथे पर तिलक लगाया. दोपहर का भोजन किया और निकल पड़ा रेशम की हत्या करने के लिये. जैसे ही रेशम कोचिंग से पढ़ कर घर आ रही थी, उसी दौरान दोनों हाथ में चाकू लेकर उस पर हमला कर दिया. पीछे से रेशम का गला सबसे पहले काट डाला. फिर भी उसके शरीर पर लगातार दोनों चाकू से वार करता रहा. रेशम की मौत के बाद मैंने भी उसी चाकू को खुद अपने पेट में घोंप लिया, लेकिन मुङो मौत नहीं मिली.

रेशम की तरह मेरे पुत्र को भी काट डालो : मां
आरोपी अभिषेक की मां सुशीला देवी ने बताया कि इस घटना से उनके परिवार की काफी बदनामी हुई है. अभिषेक को कड़ी से कड़ी सजा मिले. रेशम की तरह अगर मेरे पुत्र को कोई काट देता है तो मुङो तनिक भी मलाल नहीं होगा. अभिषेक ने जघन्य किया है, जो क्षमा लायक नहीं है. सुशीला ने कहा कि घटना सुन वह तो अभिषेक को देखने के लिए अस्पताल भी नहीं आ रही थी. लेकिन पुलिस उसे जबरन जीप से अस्पताल ले आयी. अभिषेक के अलावा उसके चार और बेटे हैं, लेकिन कोई भी अभिषेक से मिलने नहीं आया. मां ने कहा कि कभी भी अभिषेक ने रेशम के बारे में चर्चा नहीं की. जबकि रेशम हमलोगों की पड़ोसी थी. सुशीला ने कहा कि उनकी भी दो बेटियां हैं. एक की शादी हो चुकी है, जबकि एक कुंवारी है. रेशम भी मेरी बेटी की ही तरह थी.

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