रीटेल में FDI पर मोदी का बदलेगा मूड?

रीटेल में FDI पर मोदी का बदलेगा मूड?

narendra-modi. retail

बीजेपी के वाइस प्रेजिडेंट और जनरल सेक्रेटरी राम माधव ने न्यू यॉर्क में कहा कि रिटेल सेक्टर में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (एफडीआई) को लेकर और चर्चा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसमें छोटे स्टोर्स चलाने वालों के संरक्षण के लिए उपाय होने चाहिए। नरेंद्र मोदी सरकार मल्टी-ब्रैंड रीटेल में विदेशी कंपनियों के उतरने पर अपने विरोध की भी समीक्षा करने के लिए तैयार है।

इकनॉमिस्ट जगदीश भगवती ने बताया कि उन्होंने 2013 की शुरुआत में मोदी के साथ रीटेल सेक्टर में एफडीआई के मुद्दे पर बात की थी, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। भगवती ने उम्मीद जताई कि सरकार एक वर्ष में इसे अनुमति दे देगी। अमेरिकी सरकार चाहती है कि भारत वॉलमार्ट जैसी कंपनियों के लिए यह सेक्टर खोले।

पिछली यूपीए सरकार ने सिंगल-ब्रैंड रीटेल में 100 पर्सेंट एफडीआई की मंजूरी 2012 में दी थी। इससे पहले इसके लिए सीमा 51 पर्सेंट की थी। इसके साथ ही मल्टी-ब्रैंड रीटेल में 51 पर्सेंट एफडीआई को अनुमति दी गई थी। इस पॉलिसी को बीजेपी की अगुवाई वाली मोदी सरकार ने अभी तक बदला नहीं है। हालांकि, उसके चुनाव घोषणापत्र में वादा किया गया था कि एफडीआई की अनुमति नहीं दी जाएगी।

माधव ने सीआईआई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘रीटेल में एफडीआई को लेकर हमारे विरोध को एफडीआई के पूरी तरह विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हम भारत में फॉरेन कैपिटल को निमंत्रण देना चाहते हैं, लेकिन कोई भी देश बिना रेग्युलेशन के फॉरेन इनवेस्टमेंट की इजाजत नहीं देता। रीटेल में एफडीआई एक ऐसा एरिया है, जिसके लिए और चर्चा की जरूरत है। बीजेपी के घोषणापत्र में यह कहा गया है।’

इस मौके पर कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रफेसर भगवती ने कहा कि मोदी ने सत्ता के पहले चार महीनों में गर्वनेंस में सुधार के लिए काफी कदम उठाए हैं, लेकिन उनसे जल्दबाजी में रीटेल सेक्टर को विदेशियों के लिए खोलने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने बताया, ‘मैंने जब डेढ़ वर्ष पहले अहमदाबाद में लेक्चर दिया था तो सभी लोगों ने मुझसे कहा था कि मुख्यमंत्री मोदी से रीटेल सेक्टर को खोलने की बात न करें। मैंने हालांकि बात की। हमने एक-दूसरे से अपने विचार साझा किए और मैंने पाया कि वह मुद्दे को बेहतरीन ढंग से समझ रहे थे। मैं यह भविष्यवाणी करूंगा कि लगभग एक वर्ष के समय में वह ऐसा करेंगे, लेकिन तुरंत नहीं। पहले ही डिफेंस और इंश्योरेंस में एफडीआई सीमा बढ़ाई गई है।’

भगवती ने कहा कि ऐसे बदलावों को लागू करने में समय लगता है। उन्होंने कहा, ‘रीटेल एफडीआई जैसी किसी चीज को आप उनसे तुरंत करने की उम्मीद नहीं कर सकते। कोई बेवकूफ व्यक्ति ही ऐसा काम करेगा, जो उसे राजनीतिक मुश्किल में डाल दे। लोकतांत्रिक राजनीति में खुद को भी देखना होता है।’

सभार: नभभारत टाइम्स

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