राज्य सरकार ने अब नए क्षेत्रों में निवेश के मौके तलाशने का निर्णय लिया

राज्य सरकार ने अब नए क्षेत्रों में निवेश के मौके तलाशने का निर्णय लिया

बिहार को लेकर निवेशकों की बेरुखी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अब नए क्षेत्रों में निवेश के मौके तलाशने का निर्णय लिया है। इसके लिए वह अब खास तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन के क्षेत्र में निवेशकों को लुभाएगी। इसके लिए उसने इन क्षेत्रों के लिए नई नीति बनाने का भी फैसला लिया है। राज्य सरकार की योजना इन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की है। राज्य सरकार के मुताबिक इससे बाहरी लोगों के साथ-साथ राज्य के लोगों को भी फायदा होगा।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘बिहार को दोनों क्षेत्र में मोटे निवेश की जरूरत है। राज्य सरकार अपनी तरफ से काम कर रही है, लेकिन हमें इस मामले में निजी सहयोगियों की भी जरूरत है। अगर बिहार में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में निवेशक आते हैं, तो इससे राज्य में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास होगा। वहीं, पर्यटन के विकास से लोगों की आमदनी में इजाफा होगा। राज्य सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों के लिए नई नीतियां बनाने का फैसला किया है। ये नीतियां खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बनाई गई हमारी नीति के तर्ज पर बनाई जाएंगी। इसके तहत हमने निवेशकों को कई रियायतें देने का फैसला किया है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों और होटलों के निर्माण के लिए हम प्रक्रिया को भी सरल बना रहे हैं, ताकि निवेशकों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।’

इन प्रस्तावित नीतियों के तहत राज्य सरकार ने निवेशकों को मोटी रियायतें देने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक इस नीति में राज्य सरकार निवेशकों को कुल निवेश का 35 फीसदी का अनुदान के रूप में दे सकती है। साथ ही, इसमें जमीन की कीमत भी शामिल होगी। इसके तहत 75 लाख रुपये तक का ही अनुदान राज्य सरकार देगी। वहीं, राज्य सरकार ने नए होटलों को विलासिता कर में भी पूरी तरह से रियायत देने का फैसला लिया है। नई नीति के तहत होटलों को खाने-पीने के सामने पर भी वैट से रियायत देने के बारे में राज्य सरकार विचार कर रही है।

सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को करों से रियायत देने का भी फैसला किया गया है। दवाओं पर भी वैट में रियायत देने के बारे में भी राज्य सरकार विचार कर रही है। नई नीति के तहत राज्य सरकार निवेशकों को परियोजना के वास्ते बैंकों से लिए गए कर्ज पर भी कुछ रियायतें देने पर भी विचार कर रही है। राज्य औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली रियायतों का फायदा भी इन्हें दिया जाएगा।

बिहार पर्यटन और स्वास्थ्य के मामलों में देश में काफी पीछे रहने वाले राज्यों में से एक है। राज्य में बीते कुछ सालों में पर्यटन के तेज विकास के बावजूद बिहार को आर्थिक फायदा नहीं मिल पा रहा है। राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक इस नई नीति से राज्य में पर्यटन क्षेत्र में ज्यादा निवेशक आएंगे, जिससे पर्यटक सुविधाओं में इजाफा होगा।

वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं के घोर अभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा ध्यान देने का फैसला लिया है। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया, ‘आमतौर पर हर साल राज्य से 30-40 हजार मरीज दूसरे शहरों की तरफ रुख करते हैं। राज्य में एक भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं होने की वजह से लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं।’

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