योग-आसन – डायबिटीज में फायदेमंद

योग-आसन – डायबिटीज में फायदेमंद

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डायबिटीज एक ऐसा चयापचय (मेटाबॉलिज्म) संबंधी रोग है, जिसमें प्रमुख समस्या शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाना होता है। आजकल यह सबसे अधिक पाई जाने वाली बीमारियों में से एक है। इस रोग के सबसे प्रमुख कारण अनियमित जीवनशैली, व्यायाम की कमी तथा मानसिक तनाव हैं। यौगिक जीवनशैली अपना कर इस समस्या को खुद से दूर रखा जा सकता है
प्राणायाम
मधुमेह जैसी बीमारी को दूर करने के लिए प्राणायाम की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस के लिए कपालभाति, अग्निसार, बंध तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास बहुत महत्वपूर्ण है।
आसन
सूर्य नमस्कार के कुछ चक्रों का नियमित अभ्यास करने पर इस समस्या को अपने से दूर रखा जा सकता है। इसके साथ ही वे लोग, जो इस रोग से एक-दो साल पहले ही ग्रस्त हुए हैं, वे भी योग्य मार्गदर्शन में सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से रोग को पूर्णतया दूर कर सकते हैं। किन्तु गंभीर रोगी को अन्य आसनों का भी अभ्यास करना चाहिए। इनमें पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, उष्ट्रासन, सुप्त वज्रासन, मेरूवक्रासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन तथा हलासन प्रमुख हैं।
मेरूवक्रासन की अभ्यास विधि
दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैला कर बैठ जाएं। पैरों को आपस में जुड़ा रखें। दाएं पैर को घुटने से मोड़ कर इसके पंजे को बाएं पैर के घुटने के बायीं ओर रखें। बाएं हाथ की कुहनी को दाएं पैर के घुटने के पास रखते हुए इसके पंजे को स्पर्श करने का प्रयास करें। दाएं हाथ को पीठ के पीछे रखते हुए धड़ को दायीं ओर यथासंभव मोड़ने का प्रयास करें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुकें। इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरी तरफ भी करें।
अग्निसार प्राणायाम की अभ्यास विधि
ध्यान के किसी भी आसन, पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन पर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। ज्यादा बेहतर पद्मासन होता है। एक गहरी श्वास अंदर लेकर पूरी श्वास मुंह के द्वारा बाहर निकालें। अब श्वास को बाहर रोक कर दोनों हाथों को घुटनों पर सीधा रख कर पेट को जल्दी-जल्दी अंदर-बाहर करें। जब तक श्वास को सहजता से रोक सकते हैं, तब तक पेट को अंदर बाहर करते रहें। किसी भी प्रकार की असहजता होने के पहले ही पेट को सामान्य करें और फिर हाथ को सामान्य रखते हुए श्वास को अंदर लेकर सहज करें। इसकी तीन-चार आवृत्तियों का अभ्यास करें।
सीमाएं
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा हार्निया के रोगी इसका अभ्यास योग्य मार्गदर्शन में ही करें।

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