मोदी का मेक इन इंडि‍या

मोदी का मेक इन इंडि‍या
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नई दि‍ल्‍ली। भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लि‍ए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को ‘ मेक इन इंडिया ‘ योजना लॉन्च करेंगे। यह योजना मोदी अमेरिकी दौरे से ठीक पहले ही शुरू कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ग्लोबल और घरेलू उद्योगपतियों की मौजूदगी में इस योजना का लॉन्च करेंगे। सूत्रों के मुताबि‍क, प्रधानमंत्री अमेरिकी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग का न्योता देंगे।
मेक इन इंडि‍या कैंपेन को और कामयाब बनाने के लिए इसे मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू में भी लॉन्च किया जाएगा। मेक इन इंडि‍या का मकसद देश में रोजगार के नए मौके पैदा करने के साथ-साथ भारत को मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब बनाना भी है। मेक इन इंडि‍या योजना का जिक्र प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए गए अपने भाषण में दिया था।
क्‍या हो सकता है
  • सूत्रों के मुताबि‍क, अमेरि‍का, जापान, कोरि‍या, स्‍वीडन, पौलेंड, आस्‍ट्रेलि‍या, चीनख्‍ इटली, जर्मनी और फ्रांस की बड़ी कंपनि‍यां इस कैंपेन में शामि‍ल हो सकती हैं।
  • माना जा रहा है कि‍ देश को मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब बनाने के लि‍ए मोदी कॉर्पोरेट्स को बड़ी रि‍यायतें देने की घोषणा कर सकते हैं।
कई शहरों में बनेंगे क्लस्टर्स
भारत के कई राज्‍यों में इलेक्‍ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्‍टर्स हैं, लेकिन वो विकसित और आधुनिक नहीं हैं। सरकार ईएमसी के लिए कई राज्‍यों में जगहों को चिन्हित कर चुकी है, जिनमें इंटरनेशनल कंपनियों की भागीदारी भी शामिल होगी। इनमें उत्तर-प्रदेश का गाजियाबाद, गुजरात का गांधीनगर, महाराष्ट्र का नागपुर, नासिक, औरंगाबाद और ठाणे में ईएमसी स्‍थापित किए जाएंगे।
भोपाल, भुवनेश्वर, हैदराबाद, माहेश्वरम, भिवाड़ी, जबलपुर, होसुर कखंडा जैसे शहरों में भी इलेक्‍ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स लगाए जाएंगे।
इस समय ग्लोबल मार्केट में चीन, कोरिया और ताइवान जैसे दूसरे एशियाई मुल्कों के मुकाबले भारत की भागीदारी बेहद कम है। भारत ग्लोबल मार्केट से इक्विपमेंट खरीदकर एसेंबल करने का बड़ा बाजार बन चुका है। भारत में कई विदेशी मैन्युफैक्चरर्स अपनी प्रोडक्शन यूनिट लगा रहे हैं।
इंडियन इलेक्‍ट्रॉनिक सिस्‍टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम)  इंडस्ट्री इस साल 400 अरब डॉलर पर पहुंच सकती है। इसमें 100 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है और इससे 2.8 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर क्यों है जोर?
  • मौजूदा समय में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी में योगदान 16 फीसदी है और वैश्विक योगदान 1.8 फीसदी है। वहीं इसके उलट चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 34 फीसदी है और वैश्विक योगदान 13.7 फीसदी है।
  • हमारे देश में सर्विस सेक्टर पर ज्यादा फोकस किया गया है। इस सेक्टर का योगदान करीब 62.5 फीसदी है। इसलिए सरकार अपना ध्यान अब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस करना चाह रही है।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक विकास के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देना ही पड़ेगा। हालांकि यह मौजूदा समय में विकास का इंजन नहीं है। लेकिन इसे विकास का इंजन बनाया जा सकता है।

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