मैदान में फेल हुआ आपदा प्रबंधन

मैदान में फेल हुआ आपदा प्रबंधन

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स्वास्थ्य विभाग ने रावण वध के मौके पर गांधी मैदान में तीन एंबुलेंस तैनात किया था। हालाकि खुद मौके पर सिविल सर्जन थे लेकिन भगदड़ मचते ही एंबुलेंस में तैनात पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मी भी भागने लगे। आपदा प्रबंधन का कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण भगदड़ को नियंत्रित करने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाई।

चार एंबुलेंस में घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू हुआ लेकिन घायलों की संख्या इतनी थी कि एंबुलेंस कम पड़ गए। कुछ देर के लिए तो स्वास्थ्य कर्मियों को भी समझ में नहीं आया कि वे क्या करें। गांधी मैदान से श्रीकृष्ण मेमोरियल की ओर से निकलने वाले रास्ते पर खड़ी एंबुलेंस के एक ड्राइवर को काफी देर तक खोजबीन होती रही। मैदान में लोगों के बचाव के लिए आपदा प्रबंधन की टीम रहती तो शायद मरने वालों में से कुछ को बचाया जा सकता था।

इमरजेंसी में पर्याप्त नहीं थे डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गापूजा के मौके पर पीएमसीएच समेत अन्य अस्पतालों के इमरजेंसी में पर्याप्त डाक्टरों की व्यवस्था करने का दावा किया था लेकिन घटना के बाद इसकी पोल खुल गई। इमरजेंसी में सिर्फ दो डॉक्टर और दो हेल्थ मैनेजर तैनात थे। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आ गए। आनन फानन में डॉक्टरों को अस्पताल पहुंचने को कहा गया। लगभग आधे घंटे बाद वहां दस डॉक्टरों की टीम पीएमसीएच पहुंची।

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