‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम

‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिका दौरे से पहले मेक इन इंडिया प्रोग्राम की शुरूआत की है। मेक इन इंडिया प्रोग्राम का मकसद देश में मैन्युफैक्चरिंग को तेज रफ्तार देना है। सरकार ने इन सेक्टर्स में निवेश की अपील के साथ उत्पादन और निर्माण से जुड़े कुल 25 क्षेत्रों का चुनाव किया है। चीन, जापान ने निवेश को लेकर सकारात्मक संदेश दिए हैं। वहीं, अब अमेरिका की बारी है। मेक इन इंडिया के तहत निवेश के लिए चिन्हित किए गए सेक्टर्स में एमएसएमई का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख 5 सेक्टर्स हैं, इनमें उद्यमियों के लिए निवेश और भरपूर मौके हैं।
क्यों करें इनमें निवेश –
ऑटोमोबाइल
  • भारत संख्या के आधार पर 2015 तक विश्व का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोटिव मार्केट होगा।
  • ऑटो क्लस्टर दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, मुंबई, पुणे, नाशिक, औरंगाबाद, चेन्नई, बेंग्लोर, हुसूर, जमशेदपुर और कोलकाता तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • विश्व की बड़ी कार कंपनियां भारत में बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। जिससे भारत में बढ़ती मांग की आपूर्ति की जा सके।
  • भारत में एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन हब तैयार किए जा रहे हैं। जिससे निर्यात के लिए मैन्युफैक्चरिंग को बल मिलेगा।
  • निर्माण, तकनीकी और डिजाईन के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर्स के जरिए मैन्युफैक्चरर्स को मदद दी जा रही है।
  • भारत में 2020 तक सालाना 60 लाख कार का निर्माण होगा।
फूड प्रोसेसिंग –
  • भारत कृषि उत्पादों के मामले में सबसे धनी है। 2012 में भारत दुनिया में फल, सब्जियों औऱ मीट के उत्पादन में नंबर एक रैंक पर भी पहुंचा है।
  • भारत में 127 एग्रो क्लाइमेटिक जोन आइडेंटीफाई किए गए हैँ।
  • पूरे देश में फूड प्रोसेसिंग को लेकर ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टीट्यूट बने हुए हैं।
  • 2008-09 में 42 मेगा फूड पार्क की घोषणा की गई थी। कुल तीन मेगा फूड पार्क बनाए जा चुके हैं। बाकी पर तेजी से काम चल रहा है। इन मेगा फूड पार्क के लिए 98 अरब रुपए का निवेश किया गया है। इन मेगा फूड पार्क में कुल 1200 प्लॉट्स हैं। जो मूलभूत सुविधाओं से युक्त हैं। इसमें उद्यमी आसानी से यूनिट स्थापित कर सकते हैं।
  • यूनिट में कुशल श्रमिकों पर लगने वाली लागत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी सस्ती है।
  • केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा यूनिट स्थापित करने पर टैक्स छूट और कैपिटल सब्सिडी, इंसेटिव, इत्यादि शामिल हैं।
  • 121 कोल्ड चेन प्रोजेक्ट्स भारत में मौजूद हैं।
टेक्सटाइल एंड गारमेंटस –
  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है।
  • हैंडलूम बाजार में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 63 फीसदी है।
  • टेक्सटाइल फाइबर और यार्न उत्पादन में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 14 फीसदी है। भारत जूट उत्पादन के मामले में वैश्विक स्तर पर अव्वल है वहीं, सिल्क और कॉटन में दूसरे स्थान पर है।
  • भारत में ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की संख्या में दिनों दिन बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी वजह से टेक्सटाइल की डिमांड में भी बढ़ोत्तरी होगी।
  • भारत में प्रचुर मात्रा में रॉ मटेरियल है। इसलिए निरंतर मैन्युफैक्चरिंग में बाधा नहीं आती है।
  • टेक्सटाइल में प्रमुख तौर पर एमएसएमई जुड़े हैं। इसमें कुशल श्रमिकों की संख्या भी अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा और इन पर आने वाली लागत सस्ती है।
लेदर
  • भारत में सालाना 1.1 करोड़ यूएस डॉलर का लेदर उत्पादन होता है।
  • इसमें निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। भारत में लेदर निर्यात 1990 -91 में 1.42 अरब डॉलर था जो बीस सालों में बढ़कर  2013-14 में 6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
  • अगले पांच सालों में लेदर निर्यात सालाना 24 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है।
  • इसके अलावा लेदर की घरेलू बाजार में भी अच्छी खासी मांग है। अगले पांच सालों में घरेलू बाजार में दोगुनी मांग हो जाएगी।
  • लेदर उत्पादन और कुशल श्रमिकों पर आने वाली लागत दर अन्य देशों के मुकाबले बहुत ही सस्ती है।
बॉयोटेक्नोलॉजी
  • भारत विश्व का 12वां सबसे बड़ा बॉयोटेक हब है। एशिया महाद्वीप में भारत बॉयोटेक के मामले में तीसरे स्थान पर है।
  • यूएसए के बाद भारत के पास ही सबसे ज्यादा यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन के द्वारा एप्रूव प्लांट्स हैं।
  • सरकार ने 2012-2017 अवधि के दौरान बॉयोटेक्नोलॉजी पर 3.7 अरब डॉलर खर्च का लक्ष्य रखा है।
  • भारत री कॉंबिनेंट हेपाटाइटिस बी वैक्सीन का प्रमुख उत्पादक देश है।
  • कई क्लस्टर्स और इन्क्यूबेशन सेंटर्स राज्यों में बॉयोटेक को बढ़ावा देन के लिए बनाए गए हैं।
  • फॉर्मा उत्पादन में चीन ने हाल ही में कहा है कि वह रिसर्च में भारत के साथ भागीदारी करेगी।

 

 

 

 

 

 

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