माल ढुलाई में भी हो रहा है गोलमाल

माल ढुलाई में भी हो रहा है गोलमाल

28_09_2014-28rail1a

रेलवे में न सिर्फ रेल आरक्षण टिकट की कालाबाजारी हो रही है बल्कि माल ढुलाई में भी जमकर गोलमाल हो रहा है। रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से कम भाड़ा देकर ज्यादा सामान एक से दूसरी जगह भेजा जा रहा है, जिससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। दिल्ली के स्टेशनों पर इस तरह के कई मामले पकड़े जा चुके हैं।मालगाड़ी हो या फिर ट्रेन में लगने वाला ब्रेक यान (पार्सल ले जाने वाला डब्बा) सभी जगह कम रेल भाड़ा लेकर ज्यादा माल भेजने का खेल चल रहा है। इस तरह की शिकायतें लगातार मिलने पर उत्तर रेलवे के सतर्कता विभाग ने कुछ माह पहले भी जांच शुरू की थी और नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन सहित अन्य स्टेशनों पर छापे के दौरान कम वजन दिखाकर ज्यादा माल भेजने के मामले सामने आए थे। अब त्योहार में ट्रेनों में भीड़ के दौरान टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए चलाए गए विशेष अभियान के दौरान भी इस तरह की अनियमितता का खुलासा हुआ है।सतर्कता विभाग की टीम को कुछ दिन पहले हावड़ा-कालका मेल (12311) में ब्रेक यान की जांच के दौरान पार्सल भार और उसके बदले चुकाए गए भाड़े में गड़बड़ी का पता चला। ब्रेक यान में मैसर्स राजरानी लॉजिस्टिक्स तथा मैसर्स कुरबान अली द्वारा बुक कराए गए पार्सल को फिर से तौलने पर 2556 किलोग्राम ज्यादा भार निकला, जिसका किराया लगभग डेढ़ लाख रुपये बनता है, जिसे रेल के पास जमा नहीं कराया गया था। इसी तरह कुछ दिनों पहले नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक मालगाड़ी में जांच के दौरान 14.78 टन ज्यादा माल मिला था, जिसका भाड़ा 8,23,889 रुपये रेलवे को जमा नहीं कराया गया था। पुरानी दिल्ली में भी जांच के दौरान एक मालगाड़ी में आठ टन से ज्यादा माल पकड़ा गया था। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ी रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से ही संभव है, जो एक साजिश के तहत बुक कराए गए माल का भार कम दिखाकर उसी के अनुसार भाड़ा रेलवे के रिकार्ड में जमा कराते हैं। इसके एवज में माल बुक कराने वाले से पैसे ले लेते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस काम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। इसमें रेलवे कर्मचारी, दलाल व व्यापारी मिले हुए हैं, जिनकी वजह से रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

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