भारतीय SME को बनाना है अर्थव्यवस्था की रीढ़ तो जापान से सीखनी होगी तकनीक

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भारत और जापान दोनों में अपार कारोबारी संभावनाएं और क्षमताएं  हैं। जापान में एसएमई जहां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल है। वहीं, भारत की एसएमई की स्थिति अभी चिंताजनक है। मेक इन इंडिया के जरिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट देने की बात हो रही है। जबकि जापान में ज्यादातर स्मॉल इंटरप्राइजेज मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े हैं और अर्थव्यवस्था में बड़ी भागीदारी करते हैं। भारत की एसएमई को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए जापान के मुकाबले तकनीकी और प्रबंधन के स्तर पर काफी मजबूत होना होगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जापान यात्रा की है। इस दौरान जापान ने भारत के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की है। साथ ही अगले पांच सालों में बड़े निवेश की बात कही है। आइए जानते हैं कि जापान की एसएमई क्यों है भारत के मुकाबले काफी आगे –
जापान की एसएमई अर्थव्यवस्था की रीढ़ – 
  • जापान की एसएमई जापानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्‍डी है।
  • जापान की अर्थव्यवस्था में 99.7 फीसदी एसएमई हैं।  4 करोड़ 21 लाख कंपनियां एसएमई के दायरे में हैँ। इनमें सबसे ज्यादा स्मॉल इंटरप्राइजेज की भागीदारी है।
  • करीब 70 फीसदी कर्मचारी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में हैं।
  • लार्ज इंटरप्राइजेज में टोयोटा, होंडा, सोनी, जैसै नाम शामिल हैं। ये इंटरप्राइजेज एसएमई के सहयोग से चलते हैं।
  • सर्विस इंडस्ट्री, रिटेल इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री को प्रमुख तौर पर एसएमई संचालित करते हैं।  लोकल इकोनॉमी को मजबूत करने में इनका बड़ा योगदान है। दरअसल, इनमें रोजगार के भरपूर अवसर तैयार होते हैं।
परिभाषा में फर्क  – 
जापान में स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज की परिभाषा का आधार कैपिटल इन्वेस्टमेंट या कर्मचारियों की संख्या है। जबकि भारत में सिर्फ कैपिटल इन्वेस्टमेंट के जरिए ही एसएमई की पहचान की जाती है। मौजूदा समय भारत में एसएमई परिभाषा के बदलाव की बात चल रही है।
अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत में एसएमई के निवेश का दायरा अभी बहुत ही कम है।
जापानी एसएमई की परिभाषा –
क्रम संख्या सेक्टर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कर्मचारियों की संख्या
1 मैन्युफैक्चरिंग व अन्य 30.0 करोड़ येन या उससे कम  300 या उससे कम
2 होलसेल 10.0 करोड़ येन या उससे कम 100 या उससे कम
3 रिटेल 5.0 करोड़ येन या उससे कम 50 या उससे कम
4 सर्विस 5.0 करोड़ येन या उससे कम 100 या उससे कम
जापान में एसएमई और लार्ज कंपनियों की हिस्सेदारी – 
स्मॉल इंटरप्राइजेज 87.0 फीसदी इंटरप्राइजेज 366 लाख कंपनियां
मीडियम इंटरप्राइजेज 12.7 फीसदी 534 हजार कंपनियां
लार्ज इंटरप्राइजेज 0.3 फीसदी 12.3 हजार कंपनियां
अति सूक्ष्म इंटरप्राइजेज की परिभाषा – 
अति सूक्ष्म इंटरप्राइजेज की परिभाषा भी बनाई गई है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग व अन्य के अंतर्गत आने वाले इंटरप्राइजेज को तब अति सूक्ष्म माना जाएगा जब उनमें कर्मचारियों की संख्या 20 या उससे कम होगी। वहीं, कॉमर्स एवं सर्विस सेक्टर में जिन इंटरप्राइजेज के पास 5 या उससे कम कर्मचारियों की संख्या होगी उन्हें अति सूक्ष्म इंटरप्राइजेज के दायरे में रखा जाएगा।
तकनीकी और प्रबंधन 
  • जापान में एसएमई हाईटेक तकनीकी का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग के लिए करते हैं। प्रोडक्ट क्वालिटी के स्तर पर भी जापान में काफी सख्ती है। हालांकि, भारत में अभी तकनीकी के मामले में एसएमई काफी पीछे है। इसके अलावा क्वालिटी पर भी अभी कोई खास पहल नहीं है।
  • जापान में एसएमई को मदद देने के लिए करीब नौ यूनिवर्सिटी हैं ,जो उद्यमियों को उत्पादन में सहयोग देती है। भारत में इस तरह की यूनिवर्सिटी का अभाव है।
  • जापान में स्किल डेवलपमेंट को लेकर खासा ध्यान दिया जाता है। जबकि भारत में एसएमई को बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट दिए जाने की जरूरत है। हालांकि, भारत ने जापान के स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम को अपनाने की बात कही है।
  • खासतौर से भारत जापान से ऑटो कंपोनेंट और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का आयात करता है। भारत में इसे प्रतिस्पर्धा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर्स और अन्य देशों से निवेश करने की गुजारिश की गई है। ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में तकनीकी का प्रवेश हो सकता है।
भारत से ज्यादा चीन-जापान के कारोबारी रिश्ते हैं मजबूत
भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में जापान की तरफ से इन्वेस्टमेंट तो किया ही जा रहा है। इकोनॉमिस्ट गीतांजली नटराजन और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस के प्रोफेसर डॉ. अश्वनी की तरफ से हाल में पेश किए गए पेपर- “इंडिया-जापान इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंटः गेन्स एंड फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट” के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कारोबार की अपार संभावनाएं हैं, फिर भी इंडिया और जापान के मुकाबले, चीन-जापान की होने वाला बायलेटरल ट्रेड 20 गुना ज्यादा है। पेपर में कहा गया है कि भले ही बीते सालों में इंडिया का ग्लोबल ट्रेड तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसमे जापान की हिस्सेदारी घटी है।
कहां हैं मौके
  • इस रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया को जापान में आईटी, टेक्सटाइल्स, फाइबर प्रोडक्ट्स और फार्मास्युटिकल्स प्रोडक्ट्स के एक्सोपर्ट की जबरदस्त संभावनाएं हैं।
  • पीएम नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बाद होंडा और कई कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश का आश्वासन दिया है। यदि इनका निवेश होता है तो ऑटो एनिसेलेरी कंपनियों को काफी मौके मिल सकते हैं।
  • जापान में ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एग्रिकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट एथॉरिटी (अपेडा) ने सुझाव दिया है कि जापान की सरकार को इंडियन सर्टिफिकेशन एजेंसियों को जापानी कंपनियों के बराबर स्टेटस देना चाहिए। इस कदम से जापान के बाजार में इंडियन प्रोडक्ट्स की कीमतें कम हो जाएंगी।
  • दरअसल, इस समय जापान को एक्सपोर्ट होने वाले प्रोडक्ट की कीमतें दूसरे मुल्कों को एक्सपोर्ट होने वाले उत्पादों के मुकाबले ज्यादा होता है, क्योंकि जापान की एजेंसियों की तरफ से होने वाला सर्टिफिकेशन की कॉस्ट भारतीय एजेंसियों के मुकाबले ज्यादा है। अगर भारतीय एजेंसियां को जापानी एजेंसियों के बराबर स्टैंडर्ड मिल जाता है तो वो भी ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स को सर्टिफाई कर सकेंगे। भारत से एक्सपोर्ट होने वाले ऑर्गेनिक फूड में बासमती राइस, शहद, मसाले, चाय, गारमेंट्स और कुछ ड्राई फ्रूट्स शामिल हैं।
जापानी उद्यम ने दिया है सहयोग का आश्वासन
गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कारोबार रिश्तों को मजबूत कर चुके जापानी उद्योग ने भरोसा जताया है कि वे भारतीय कंपनियों के साथ भागीदारी बढ़ाएंगे।
जापानी उद्योग मंडल के चेयरमैन अकियो मिमुरा ने कहा था ‘‘हमने देखा है कि आपके मजबूत नेतृत्व में गुजरात ने किस प्रकार तरक्की की है। मुझे भरोसा है कि उनका उद्योग मंडल के सदस्यों की संख्या 12.6 लाख है जिनमें लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एसएमई) की संख्या उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि जापान के लघु एवं मध्यम उपक्रम भारतीय उपक्रमों के साथ काम करने का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।
जापान करेगा भारत के साथ कारोबारी रिश्ते मजबूत – 
  • जापान की पब्‍लि‍क प्राइवेट कंपनि‍यां अलगे पांच साल में 2.10 लाख करोड़ रुपए का नि‍वेश करेंगी।
  • भारत में बुलेट ट्रेन चलाने के लि‍ए तकनीकी मदद देने की इच्‍छा जाहि‍र की है।
  • रेल लिंक के लि‍ए जापान देगा तकनीकी सहायता।
  • जापान ने गंगा सफाई में अपना योगदान देने की भी बात कही।
  • न्‍यूक्लियर  डील आगे बढ़ाने की बात कही।

सभार : भास्कर

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