बाल विवाह को लिए छात्राएं कर रही पढ़ाई से तौबा

बाल विवाह को लिए छात्राएं कर रही पढ़ाई से तौबा

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देवघर। झारखंड में अब भी बाल विवाह के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। बिहार और राजस्थान के बाद कम उम्र की सर्वाधिक शादियां झारखंड में होने के आंकड़े सामने आए हैं जिनमें देवघर जिला सबसे आगे है। ग्रामवाणी कम्यूनिटी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अगस्त-सितंबर 2013 में कराए गए सर्वे के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में 48.3 फीसदी लड़कियों की शादी 18 से कम उम्र में हो जाती है जबकि देवघर में 72.4, गिरिडीह में 71.2 और हजारीबाग में औसतन 65.7 फीसद लड़कियों का बाल विवाह हो जाता है। देवघर में देवीपुर कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय इसका उदाहरण है जिसकी 10वीं और 11वीं की लगभग 60 छात्राओं में से 35 का विवाह हो चुका है। इनमें से लगभग 20 लड़कियां मां बनने वाली हैं। सर्वे से हुए खुलासे के बाद झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग 11 अक्टूबर से बाल विवाह के विरूद्ध राज्यव्यापी अभियान छेड़ रहा है जिसकी शुरूआत रांची के कांके स्थित कस्तूरबा विद्यालय से होगी।  यह अभियान राज्य के सभी 284 कस्तूरबा विद्यालयों में चलेगा जिसके लिए छात्राओं के अभिभावकों को भी बुलाया जाएगा। आयोग के  सदस्य संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि खरसावां, रेहला, देवीपुर और मनिका स्थित कस्तूरबा विद्यालयों के निरीक्षण में चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं हैं। कई छात्रएं महीनों से विद्यालयों से अनुपस्थित रहीं, जिसका कारण बताने में विद्यालय प्रबंधन आनाकानी करते रहे।

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