बकरीद पर बकरे की ऑनलाइन खरीद संभव

बकरीद पर बकरे की ऑनलाइन खरीद संभव

बक़रीद के दिन क़ुर्बानी के लिए बकरे ख़रीदे जाते हैं, इसके लिए मंडियां लगती हैं, मेले लगते हैं. लेकिन शायद अब ये तरीक़ा भी डिजिटल एज में आउटडेटेड होता जा रहा है. क्योंकि अब बकरे बेचे जा रहे हैं ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टलों पर. ‘ओएलएक्स’ से लेकर ‘क्विकर’ तक कई ऑनलाइन बाज़ारों में बकरों के वर्गीकृत इश्तेहार मौजूद हैं. ये बकरे चार हज़ार से 25 लाख तक की क़ीमत के हैं. उत्तर प्रदेश के फिरोज़ाबाद के हेमंत कुमार ने ओएलएक्स पर अपने बकरे की क़ीमत 25 लाख रुपए रखी है. उन्होंने कहा, “हमारे बकरे पर चांद बना हुआ है और ये पूरी तरह से स्वस्थ है. खरीदार इसकी 17-18 लाख तक की क़ीमत लगा चुके हैं.” वेबसाइट के सर्च में जाकर अपनी ज़रूरत टाइप करने पर शहर के नाम के साथ आपको बकरे की तस्वीरें और क़ीमत सब कुछ मिल जाएगा. ओएलएक्स पर बकरों के क़रीब पांच हज़ार इश्तेहार हैं, जबकि क्विकर पर ये संख्या एक से डेढ़ हज़ार के बीच है.

सही क़ीमत के लिए इश्तेहार

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के तिलकनगर इलाक़े में रहने वाले राजू दास एक साड़ी दुकान में सैल्समेन हैं. राजू बताते हैं कि ऑनलाइन इश्तेहार उन्होंने डाला क्योंकि जो लोग घर पर बकरा ख़रीदने आ रहे थे, उनमें से कोई सही क़ीमत नहीं दे रहा था. उनका बकरा अभी बिका नहीं है, लेकिन वेबसाइट के ज़रिए कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है. पटना के नौसामोड़ इलाक़े में रहने वाले काशिफ़ वारसी ने अपने दोस्त तारिक़ के दो बकरों का ऑनलाइन इश्तेहार डाला था. बक़ौल तारिक़ उन्होंने ऑनलाइन इश्तेहार का विकल्प चुना क्योंकि वे बकरा बेचने के लिए रस्सी थामे चौक-चौराहों या बकरी बाज़ार तक नहीं जाना चाहते थे. इश्तेहार देखकर कुछ ख़रीददार बकरा देखने तारिक के घर आए. उनके मुताबिक बकरा अब बिक चुका है.

इन राज्यों के बकरे ज़्यादा बिकाऊ

सबसे ज़्यादा इश्तेहार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों से हैं. इश्तेहारों की तस्वीरों में बकरा मालिक ख़ास अंदाज़ में ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. किसी बकरे पर अरबी में ‘अल्लाह’ लिखा हुआ है तो किसी पर ‘786’. विज्ञापनों में बकरे की नस्ल, वज़न, रंग-रुप और दूसरी ख़ासियतें भी बताई जा रही है, तो कई मालिक अपने बकरों के उचित लालन-पालन और तंदुरुस्ती के नाम पर ऊंची क़ीमतें मांग रहे हैं. बकरे तस्वीरों में पत्ते खाते हुए तो किसी में कलाबाज़ी दिखाते हुए नज़र आ रहे हैं.

होम डिलेवरी उपलब्ध नहीं

हालांकि बकरों की ख़रीद में ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिए अभी ‘कैश ऑन डिलेवरी’ या ‘ईएमआई’ जैसे विकल्प मौजूद नहीं हैं. ऑनलाइन बकरा पसंद करने के बाद आपको ख़रीदारी के पुराने तरीक़ों की ओर ही लौटना होगा. यानी की बताए पते पर जाकर बकरा देखना होगा और फिर अगर वहां जाकर सौदा पट जाए तो भुगतान कर बकरा ख़ुद घर लाना होगा. बकरा ख़रीदने की बात सुनने में जितनी आसान लगती है उतनी आसान होती नहीं है. इस बाज़ार के ज़्यादातर लोग लंबे अर्से से इस धंधे में हैं. आख़िर ख़रीदार बकरा ख़रीदने से पहले किन बातों की तफ़्तीश करते हैं.

इस्लामी कानून

अक्सर ख़रीदार ये जानना चाहते हैं कि बकरे की नस्ल क्या है और उसे कहां पाल-पोस कर बड़ा किया गया है. साथ ही साथ बकरा कितने साल का है ये भी काफ़ी मायने रखता है. बकरा कम से कम दो साल का होना ही चाहिए और अगर इस्लामी क़ानून के सारे नियमों के मुताबिक़ बकरा ईद में क़ुर्बानी देने लायक़ है तब फिर उनका मोल भाव शुरू होता है.

जमुनापारी नस्ल

बाज़ार में बकरे को लेकर ख़ूब मोल भाव होता है. एक बकरा क़रीब तीन हज़ार से लेकर तीन लाख तक की क़ीमत में बिकता है. बाज़ार में सबसे ज़्यादा सफ़ेद जमुनापारी नस्ल के बकरे की मांग है जबकि काले और भूरे बकरे इसकी तुलना में कम दाम में बिकते हैं. लेकिन सबसे अधिक क़ीमत ‘दुम्बा’ की है जो कि एक तरह का भेड़ होता है और अपने मोटे दुम की वजह से जाना जाता है. ऑनलाइन बाज़ार

ईद में क़ुर्बानी के लिहाज़ से इसे सबसे अच्छा माना जाता है इसलिए इसकी क़ीमत ज़्यादा होती है. मवेशियों की क़ीमत को लेकर मोल-भाव तो सदियों से चलता आ रहा हैं लेकिन रईस अहमद को उम्मीद है कि नए तरीक़े का इस्तेमाल करके वे अपने 60 किलोग्राम के बकरे की क़ीमत ज़्यादा वसूल सकते हैं. वे अपने बकरे में ख़रीदार की दिलचस्पी जगाने के लिए उसकी तस्वीर खींचकर उसे ऑनलाइन पोस्ट कर देते हैं.

गर्मी और धूल

अहमद का कहना है कि ऑनलाइन बकरा बेचने की यह उनकी पहली कोशिश है और लोगों की ओर से बड़े पैमाने पर मिलने वाली प्रतिक्रिया पर हैरान है.

वे कहते हैं, “मुझे हर जगह से फ़ोन आ रहे हैं. ख़रीदार बकरे की उम्र और तंदरूस्ती के बारे में जानना चाह रहे हैं. एकबार तसल्ली होने के बाद वे ऑनलाइन पैसा चुकाते हैं और मैं उनके घर बकरे पहुंचाता हूं क्योंकि वे गर्मी और धूल में बाज़ार नहीं आना चाहते हैं.”

धार्मिक प्रतीक

कई व्यापारी अपने बकरे की अहमियत को बढ़ाने के लिए उस पर धार्मिक प्रतिकों का इस्तेमाल करते हैं. बकरे की ऑनलाइन बिक्री का भारत में चलन शायद इस बक़रीद से हुआ है. बक़रीद में क़ुर्बानी दिए गए बकरे का एक तिहाई हिस्सा ग़रीबों में बांटते हैं, एक तिहाई दोस्तों को देते हैं और बाक़ी हिस्से को परिवार के लोग अपने पास रखते हैं. बकरा ख़रीदना बक़रीद के त्यौहार का एक अभिन्न हिस्सा है. महंगा बकरा ख़रीदने के बाद ख़रीदार उन्हें सजाने के लिए घुंघरू और हार भी ख़रीदते हैं.

साभार: बीबीसी

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