पवन श्रीवास्तव ने फेसबुक पर पेज बनाकर जुटाए पैसे से बनाई फिल्म

पवन श्रीवास्तव ने फेसबुक पर पेज बनाकर जुटाए पैसे से बनाई फिल्म
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अंडमान में फिल्म बनाने में रुचि रखने वालों को गुर सिखायेगा एक बिहारी फिल्ममेकर। यह फिल्ममेकर हैं पवन श्रीवास्तव। सारण जिले के रहने वाले इस युवा को अंडमान फिल्म सोसायटी से बुलावा आया है। इसके लिए अंडमान फिल्म सोसायटी ने एक वर्कशॉप रखा है। इसमें पवन श्रीवास्तव यह ट्रेनिंग देंगे कि आमजनों से पैसे जुटा कर कैसे फिल्म बनाई जा सकती है। पवन को इस वर्कशॉप में इसलिए बुलाया गया है, क्योंकि उन्होंने एक फिल्म ‘नया पता’ बनाया है, जिसके लिए पैसे का जुगाड़ उन्होंने आमजनों से ही किया था। उन्होंने इसके लिए फेसबुक पर एक पेज बनाया और लोगों से फिल्म में पैसे लगाने की अपील की थी। पोर्ट ब्लेयर में 24 सितंबर से शुरू होने वाले इस दस दिवसीय वर्कशाप में 40 लोग हिस्सा लेंगे, जिसमें इससे जुड़े छात्र होंगे।
क्राउड फंडिंग से बनाया था नया पता फिल्म
पवन श्रीवास्तव के मन में विस्थापन को लेकर हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है। उन्होंने भी इस दर्द को सहा था। इसे लेकर वर्ष 2011 में उन्होंने इस पर कहानी लिखनी शुरू की। फिल्म को लेकर निर्माताओं से बात की, पर कुछ नहीं हुआ। मन में निराशा हुई पर दोस्तों ने कहा-‘यार जबर्दस्त स्टोरी है, हम तुम्हारे साथ हैं।’ इसके बाद कम्प्यूटर साइंस से ग्रैजुएशन करने वाले पवन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। फेसबुक पर एक पेज बनाया और उन्होंने इस फिल्म में पैसे लगाने की अपील की। पवन की अपील सुनी गई और कुल 11 लाख रुपए जमा हुए। इसके बाद बन गई कम बजट की भोजपुरी फिल्म ‘नया पता’। यह फिल्म पीवीआर डायरेक्टर्स रेयर के माध्यम से 27 जून को रिलीज हुई। इस तरह से फिल्म बनाने का आइडिया काफी अनोखा था। इस आइडिया को काफी सराहा गया और फिल्म भी हिट हुई। इस फिल्म का कोई एक निर्माता नहीं था। छोटी से बड़ी राशि दान करनेवाला हर व्यक्ति निर्माता था। पवन ने इस फिल्म को बनाने के लिए दिल्ली में अपनी नौकरी भी छोड़ दी। इस फिल्म को मनसे चीफ राज ठाकरे को भी दिखाया गया था।
‘बहुत खुश हूं’ 
अंडमान फिल्म सोसायटी के बुलावे पर पवन काफी खुश हैं। उन्हें इस परिणाम की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि हमारा आइडिया इतना हिट करेगा हमने नहीं सोचा था। उधर अंडमान फिल्म सोसायटी के सचिव का कहना है कि हम लोगों को बताना चाहते हैं कि अगर मन में चाहत हो तो कुछ भी किया जा सकता है।
सोर्स : दैनिक भास्कर

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