नीतीश कुमार के एक बार फिर बिहार का मुख्‍यमंत्री बनने की अटकलें तेज

नीतीश कुमार के एक बार फिर बिहार का मुख्‍यमंत्री बनने की अटकलें तेज

नीतीश कुमार के एक बार फिर बिहार का मुख्‍यमंत्री बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस बात की संभावना जताई जाने लगी है कि नीतीश कभी भी फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि यह नीतीश पर निर्भर करता है कि वे कब फिर से बिहार की गद्दी संभालते हैं।बुधवार को मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अधिकांश विधायक इस बात के पक्ष में हैं कि जीतन राम मांझी की जगह नीतीश कुमार फिर से मुख्‍यमंत्री पद संभालें। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नीतीश बुधवार को पार्टी के विधायकों और वरिष्‍ठ नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के अधिकतर मंत्री और विधायक नीतीश के समर्थन में हैं। वहीं, नीतीश अपने आवास पर हर दिन विधायकों और नेताओं के साथ बैठक करते रहे हैं ताकि उनका फीडबैक मिल सके। इनमें से अधिकांश जेडीयू नेताओं का कहना है कि जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से जनता में गलत संदेश जा रहा है। विकास का काम ठप्‍प पड़ा है और केवल बयानबाजी हो रही है। नीतीश पर इन नेताओं की तरफ से भी फिर से बिहार की सत्ता संभालने का दबाव पड़ रहा है।गौर हो कि बिहार में विधानसभा चुनाव सिंतबर महीने में होने की संभावना है। इसके मद्देनजर पार्टी के नेताओं का मानना है कि चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में बिहार सरकार की गिरती साख और कानून-व्यवस्था की वजह से पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। यदि बीजेपी से मुकाबला करना है, तो सरकार को मजबूत नेतृत्व देना होगा। वह तभी संभव होगा जब नीतीश कुमार आगे बढ़कर अगुवाई करते हैं और फिर से सीएम बनते हैं।बताया जा रहा है कि जेडीयू के के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने नीतीश के फिर से सीएम बनने के लिए हरी झंडी दे दी है। साथ ही आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद को भी नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर कोई आपत्ति नहीं है। लालू प्रसाद का कहना उनकी पार्टी का समर्थन जेडीयू सरकार को है, न कि किसी मुख्यमंत्री को। अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इस सबके बावजूद जीतनराम मांझी को सीएम की कुर्सी से हटाने के लिए पार्टी को नए सिरे से विचार करना होगा। यदि मांझी को जबरदस्ती सीएम पद से हटाया जाता है तो पार्टी को नुकसान हो सकता है, क्योंकि बीजेपी मांझी के समर्थन में आने के संकेत पहले दे चुकी है।वैसे भी मांझी और जदयू के बीच दूरियां बढ़ती प्रतीत हो रही हैं। सत्ताधारी पार्टी जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और उनके कुछ मंत्रियों के बीच मतभेद की बात स्वीकारे जाने तथा यह कहे जाने के बाद कि उसे मांझी ही पाट सकते हैं, इस बारे में संकेत मिले हैं। जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पार्टी के एक कार्यक्रम को लेकर गए वशिष्ठ नारायण सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि मुख्यमंत्री को उनके मंत्रियों के साथ मतभेद को स्वयं पाटना चाहिए क्योंकि यह उनकी टीम है और वे सरकार चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मांझी के कुछ बयानों से पार्टी को ‘समस्याओं’ का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें ऐसे बयानों से बचने के लिए कहा गया है। मांझी द्वारा प्रदेश में आईएएस पदाधिकारियों के तबादलों को सही ठहराए जाने तथा पथ निर्माण विभाग सहित कुछ अन्य विभागों के कार्यो को लेकर कल असंतोष प्रकट किए जाने से उत्पन्न विवाद जदयू मंत्रिमंडल में दरार को उजागर करता है। वहीं, बीजेपी की ओर से मांझी की तारीफ किए जाने में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष को उसकी बुरी मंशा नजर आती है।

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