तीन साल बाद फिर आया किसान विकास पत्र

तीन साल बाद फिर आया किसान विकास पत्र

करीब तीन साल बाद ‘किसान विकास पत्र’ यानी केवीपी को नए कलेवर में मंगलवार को फिर से लॉन्च किया गया। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इसे लॉन्‍च किया। इसमें कम से कम एक हजार रुपए निवेश करना होगा। फिर एक हजार के गुणक में जितना चाहें, उतना निवेश कर सकते हैं। पैसा आठ साल, चार महीने में दोगुना होगा। लेकिन इस बार ढाई साल बाद पैसे वापस पाने का विकल्‍प भी दिया गया है। इस बार निवेशकों को 1000, 5000, 10000 और 50000 रुपए के किसान विकास पत्र उपलब्ध होंगे। किसान विकास पत्र में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी। इस बार लॉन्च किसान विकास पत्र की खासियत यह होगी कि अगर निवेशक चाहे तो इसे दो साल और छह महीने के लॉक इन पीरियड के बाद भुना सकेगा। इसके बाद इसे हर छह महीने की अवधि के बाद पूर्व निश्चित मैच्योरिटी वैल्यू पर भुनाया जा सकेगा। इसके सर्टिफिकेट सिंगल या ज्वाइंट नामों से जारी किए जाएंगे। ये सर्टिफिकेट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अनगिनत बार ट्रांसफर किए जा सकेंगे। इसके अलावा, एक पोस्ट ऑफिस से देश में कहीं भी ट्रांसफर करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा, इसके साथ नॉमिनेशन का विकल्प भी होगा। किसान विकास पत्र को गिरवी रख कर बैंकों से कर्ज भी लिया जा सकेगा। शुरुआत में किसान विकास पत्र बिक्री के लिए पोस्ट ऑफिसों में उपलब्ध होंगे, लेकिन जल्दी ही इन्हें सरकारी बैंकों की चुनिंदा शाखाओं के जरिए भी लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा। किसान विकास पत्र को पहली बार एक अप्रैल 1988 को लॉन्च किया गया था। श्यामला गोपीनाथ की रिपोर्ट सामने आने के बाद दिसंबर 2011 में इस पर रोक लगा दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस स्कीम का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था।

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