जानें क्या था कारण, ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा नहीं जाना चाहते थे पाकिस्तान?

जानें क्या था कारण, ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा नहीं जाना चाहते थे पाकिस्तान?

milkha

मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख कहा जाता है। उन्हें यह नाम भारत नहीं, बल्कि पाकिस्तान में दिया गया था। पाकिस्तान के दूसरे राष्ट्रपति अयूब खान ने उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ कहकर पुकारा था। मिल्खा सिंह को आज भी फ्लाइंग सिख के नाम से ही जाना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है, मिल्खा सिंह को जिस दौड़ ने ‘फ्लाइंग सिख’ का नाम दिया, वे उसमें हिस्सा नहीं लेना चाहते थे। जी हां, यह सही है मिल्खा सिंह पाकिस्तान की सरजमी पर आयोजित बहु प्रसिद्ध दौड़ में हिस्सा नहीं लेना चाहते थे।मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर, 1935 में पाकिस्तान में हुआ था। उन्हें फ्लाइंग सिख के नाम से भी जाना जाता है। उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह इंटरनेशनल गोल्फर हैं।                               ठुकरा दिया पाकिस्तान का आमंत्रण

1960 में आपसी विवाद को निबटाने और कूटनितिक स्तर पर संबंध बेहतर करने के लिए पाकिस्तान ने एक दोस्ताना दौड़ का अयोजन किया। पाकिस्तान चाहता था कि उसके रेसर अब्दुल खालिद के साथ मिल्खा सिंह दौड़ में हिस्सा लें। इसके लिए बकायदा पाकिस्तान ने भारतीय सरकार को दौड़ में हिस्सा लेने के लिए मिल्खा सिंह को भेलने के लिए पत्र भी लिखा। यह मामला जब मिल्खा सिंह को पता चला तो वे पूरी तरह मुकर गए। उन्होंने पाकिस्तान जान से मना कर दिया।                                                             ये था कारण 

दरअसल, मिल्खा सिंह अपने माता-पिता के साथ पाकिस्तान के मुजफ्फरपुर जिले में गोविंदपुरा गांव में रहते थे। भारत-पाकिस्तान अलगाव के समय उनके माता-पिता की उनके सामने ही उपद्रवियों ने हत्या कर दी थी। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय घर से बेघर होने वाले लाखों परिवारों में मिल्खा भी शामिल हैं। छोटी उम्र के मिल्खा जैसे-तैसे वे भारतीय आर्मी कैंप तक पहुंचे। इसके बाद उनकी बहन इशर कौर ने उसके बाद संभाला। मिल्खा सिंह अलगाव के उस खूंखार मंजर को कभी भुला नहीं पाए। यही कारण था कि वे 1960 में आमंत्रण पर पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे।

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