जन धन योजना शुरू, पहले दिन खुले डेढ़ करोड़ खाते

जन धन योजना शुरू, पहले दिन खुले डेढ़ करोड़ खाते

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में व्याप्त आर्थिक छुआछूत को दूर करने के आह्वान के साथ आज सरकार की महत्वकांक्षी वित्तीय समावेशन मिशन ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ की शुरुआत की।  
      
मोदी ने इस योजना के साथ ही बेसिक जीएसएम मोबाइल फोन के माध्यम से बैंकिंग सेवायें उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय यूनिफाइड यूएसएसडी प्लेटफॉर्म को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है और इसके माध्यम से गरीबी उन्मूलन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर लड़ेंगे तो गरीबी से मुक्ति मिल जाएगी। सरकार और सरकारी संपत्ति गरीबों के लिए है। 
        
देश को मिलकर आर्थिक छुआछूत से लडने का आह्वान करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी इस छुआछूत का शिकार है और इस योजना के माध्यम से इसे समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था और आजादी के 68 वर्षों बाद भी देश की 68 प्रतिशत आबादी वित्तीय सेवाओं से वंचित है और वे अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़ नहीं पाये हैं।  
     
मोदी ने कहा कि देश में अमीरो और उद्योगपतियों को कम दरों पर रिण मिलता है जबकि गरीबों को उससे पांच गुणा अधिक दर पर साहूकारों से रिण लेना पड़ता है। एकबार जो व्यक्ति साहूकार के चंगुल में फंस जाता है वह पूरी जिंदगी उससे बाहर नहीं निकल पाता और कभी कभी तो यह स्थिति उस व्यक्ति को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है प्रधानमंत्री ने कहा कि अमीर रिण चुकाने में भी आनाकानी करते हैं जबकि गरीब समय से पहले रिण चुकाते हैं और यदि महिलायें रिण लेती है तो वह अवश्य ही समय से पहले रिण का भुगतान करती है। उन्होंने कहा कि गरीबो का खाता खुलने पर उनमें बचत की भावना जागृत होगी जिससे न सिर्फ वह व्यक्ति समृद्ध होगा बल्कि अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ मिलेगा।  
     
मोदी ने कहा कि इस योजना से भ्रष्टाचार से निपटने में भी मदद मिलेगी। लोगों को जब सरकारी लाभ सीधे उनके खाते में पहुंचेगा तो बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जायेगी।  
    
उन्होंने कहा कि जिस लक्ष्य को लेकर यह योजना शुरू की गयी है उसे हासिल किया जाना चाहिए। इस योजना को सफल बनाने के लिए देश के सात लाख से अधिक बैंक कर्मियों को भेजे गये ईमेल का उल्लेख करते हुये मोदी ने कहा कि किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार सभी बैंककर्मियों से आह्वान किया और उसी का परिणाम है कि योजना के पहले ही दिन पूरे देश में करीब डेढ करोड़ खाते खाले गये है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है और इसके साथ मिलने वाला डेबिट कार्ड और दुर्घटना बीमा भी एक रिकॉर्ड है। अब तक न एक दिन में डेढ़ करोड़ दुर्घटना बीमा हुआ होगा और न ही डेढ़ करोड़ कार्ड जारी किये गये होंगें।  
        
उन्होंने कहा कि आज वीजा और मास्टर कार्ड को पूरी दुनिया में मान्यता मिली हुई है। क्या हम डेबिट कार्ड को यह मान्यता नहीं दिला सकते हैं। एक दिन में डेढ़ करोड़ कार्ड जारी होने से इसे स्वत: ही मान्यता मिल जायेगी। जब लोगों के पास आर्थिक संपन्नता होती है तो मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होता है। हमारी सभ्यता क्रेडिट कार्ड जीवनयापन वाली नहीं है बल्कि बचत हमारी पंरपरा है।  
      
मोदी ने कहा कि ईमेल और सोशल मीडिया के इस युग में डाकघरों की महत्ता कुछ कम हुई है लेकिन अब उसका उपयोग बैंकिंग सेवाओं के लिए किया जायेगा। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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