विशेष गाड़ियों के फेरे 7039 से घटकर 204 हुए: पश्चिम रेलवे

विशेष गाड़ियों के फेरे 7039 से घटकर 204 हुए: पश्चिम रेलवे

विशेष गाड़ियों के फेरे 7039 से घटकर 204 हुएभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने ‘अच्छे दिनों’ के वादे कर केंद्र में सत्ता हासिल की है। लेकिन इस सरकार के सत्ता में आने के बाद पश्चिम क्षेत्र के रेल यात्रियों की सुविधाओं पर जमकर कैंची चली है। इस क्षेत्र में चलने वाली विशेष गाड़ियों के फेरे 7039 से घटकर मात्र 204 रह गए हैं। यह खुालासा सूचना के अधिकार के तहत सामने आए तथ्यों से हुआ है।

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के निवासी चंदशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पश्चिम रेलवे के मुंबई स्थित कार्यालय से जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2011 से 2015 के बीच त्योहारों या अन्य मौकों पर चलने वाली विशेष गाड़ियों की स्थिति में क्या बदलाव हुआ है। साथ ही प्रीमियम और सुविधायुक्त गाड़ियों की क्या स्थिति है?

गौड़ को 15 फरवरी, 2016 को उप मुख्य परिचालन प्रबंधक (योजना) ने जो जानकारी दी है, वह चौंकाने वाली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011-12 में कुल 63 विशेष गाड़ियां चलीं और इन गाड़ियों ने कुल 3,371 फेरे लगाए। जबकि 2012-13 में 62 गाड़ियों ने 2,336 फेरे लगाए। इसी तरह वर्ष 2013-14 में 65 विशेष गाड़ियों ने 7,039 फेरे लगाए। और वर्ष 2014-15 में 47 गाड़ियों ने 1,781 फेरे लगाए। इस वर्ष यानी 2015-16 में गाड़ियों की संख्या घटकर 21 रह गई और फेरे मात्र 204 रह गए।

रेलवे की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि एक तरफ जहां विशेष गाड़ियों की संख्या और फेरों में भारी कटौती की गई है, वहीं वर्ष 2013-14 में प्रीमियम और सुविधा गाड़ियां शुरू की गईं हैं। वर्ष 2013-14 में पश्चिम क्षेत्र में 17 प्रीमियम विशेष गाड़ियों ने 476 फेरे लगाए, जबकि वर्ष 2015-16 में 11 प्रीमियम और पांच सुविधा विशेष गाड़ियां चलीं, और इन गाड़ियों ने कुल 394 फेरे लगाए।

गौरतलब है कि विभिन्न त्योहारों और छुट्टियोंे के मौकों पर रेल विभाग विशेष गाड़ियां चलाता है, क्योंकि इन मौकों पर यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ जाती है। इन गाड़ियों में वातानुकूलित, स्लीपर से लेकर सामान्य डिब्बे भी लगे होते हैं। इनका किराया भी सामान्य अर्थात मेल या एक्सप्रेस का हेाता है। इन गाड़ियों में कटौती करने से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब यात्रियों को उठानी पड़ी है।

गौर ने आईएएनएस से कहा कि उन्हें त्योहार के मौके पर यात्रा करने पर इस बात का आभास हुआ कि रेलवे ने सामान्य यात्रियों की सुविधा पर डाका डाला है, जिसकी पुष्टि के लिए उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, जिससे सच सामने आया है।

गौर ने कहा, “एक तरफ जहां रेलवे ने आम यात्री की सुविधाएं छीनी है, वहीं प्रीमियम और सुविधा गाड़ियों से आय बढ़ाने का खेल खेला है। इन गाड़ियों में सामान्य श्रेणी के डिब्बे नहीं होते, बर्थ की कीमत लगती है, किसी वर्ग अर्थात बच्चे या बुजुगरें को छूट का प्रावधान नहीं है, यात्रा निरस्त करने पर राशि वापस नहीं मिलती है।”

गौर ने कहा, “सरकार का अर्थ जनकल्याणीकारी शासन देना है, न कि कारोबार करना। मगर बीते वषरें में पश्चिम क्षेत्र के यात्रियों से छीनी गई सुविधाओं से साबित हो गया है कि सरकार अब जनकल्याणकारी नहीं रही और उसका मकसद सिर्फ अर्थ अर्जित करना हो गया है।”

रेल मंत्रालय में लंबे समय तक सलाहकार रह चुके वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह ने इस बारे में आईएएनएस से कहा, “इस तरह की विशेष रेल गाड़ियां चलाने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। लेकिन इसके पहले के रेलमंत्री जनता का ध्यान रखते हुए विशेष अवसरों पर विशेष रेलगाड़ियां चलाते रहे हैं।”

सिंह ने दिल्ली से फोन पर आईएएनएस को बताया, “लेकिन मौजूदा रेलमंत्री सुरेश प्रभु का जोर राजस्व अर्जित करने पर है। उनका सामाजिक सरोकार उतना नहीं है। बच्चों के रियायती टिकट भी उन्होंने खत्म कर दिए। ऐसे में विशेष गाड़ियों की उम्मीद इस सरकार से नहीं की जानी चाहिए।”

सिंह ने आगे कहा, “रेलमंत्री (सुरेश प्रभु) रेलवे को लाभकारी बनाने के लिए जोर लगाए हुए हैं, लेकिन आगामी रेल बजट लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के घाटे का हो सकता है।”

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