कार्लसन दूसरी बार बने चैंपियन, 11वीं बाजी में आनंद हारे

कार्लसन दूसरी बार बने चैंपियन, 11वीं बाजी में आनंद हारे

calson

नार्वे के मैग्नस कार्लसन ने भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद पर अपना दबदबा बरकरार रखते हुए लगातार दूसरे साल विश्व शतरंज चैंपियनशिप खिताब बरकरार रखा। उन्होंने रविवार को आनंद को 11वीं बाजी में हराया। सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने 45 चालों में जीत हासिल की।कार्लसन ने चैंपियनशिप की दूसरी बाजी जीतकर बढ़त ली थी, लेकिन पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने तीसरी बाजी में ही कार्लसन को हरा स्कोर बराबर कर लिया। कार्लसन को छठी बाजी में सफलता मिली और उसके बाद उन्होंने अपनी बढ़त नहीं गंवाई और रविवार को 11वीं बाजी जीतकर चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। पिछले साल चेन्नई में विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले कार्लसन ने 12 बाजियों का मुकाबला 6.5-4.5 से जीता।विशेषज्ञों की नजर में भले ही यह करीबी मुकाबला रहा हो, लेकिन आनंद 2013 की तुलना में सिर्फ एक बाजी अधिक खेल सके। चेन्नई में दस बाजियों के बाद ही फैसला हो गया था। आनंद ने इस मुकाबले से कई सबक लिए होंगे। अब वह अगले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में एक बार फिर खिताब जीतने की कोशिश करेंगे।आनंद को पता था कि ड्रॉ से वह खिताब की दौड़ में बरकरार रहेंगे, लेकिन वह आखिरी बाजी तक इंतजार नहीं करना चाहते थे और पहला मौका मिलने पर कार्लसन के लिए पेचीदगी बढ़ाने की कोशिश की। आनंद ने 11वीं बाजी में कार्लसन की तुलना में कम गलतियां कीं, लेकिन लय बरकरार नहीं रख पाए। दूसरी ओर कार्लसन ने आनंद को चाल दर चाल माकूल जवाब दिया। मैच के बाद आनंद ने स्वीकार किया कि कार्लसन ने अधिक शांतचित होकर मुकाबला खेला। विशेषज्ञों की राय में हालांकि आनंद के पास मौका था जिसे वह भुना नहीं सके।यह दूसरा मौका था जब दो खिलाड़ी लगातार दूसरी बार खिताब के लिए भिड़ें। इससे पहले 1990-91 में गैरी कास्परोव और अनातोली कारपोव के बीच खिताब के लिए मुकाबला हुआ था। आनंद ने 2000, 2007, 2008, 2010, 2012 में यह खिताब अपने नाम किया था। जबकि कार्लसन शतरंज के तीनों प्रारूप (क्लासिक, ब्लिट्ज और रैपिड) में मौजूदा चैंपियन हैं।विजेता मैग्नस कार्लसन को 4.8 करोड़ रुपये मिले उपविजेता विश्वनाथन आनंद को 3.2 करोड़ रुपये से संतोष करना पड़ा

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