कांग्रेस भाजपा में सीधी टक्कर

कांग्रेस भाजपा में सीधी टक्कर

भागलपुर में पहली बार हो रहे विधानसभा के उपचुनाव में  मैदान में सात प्रत्याशी हैं लेकिन कांग्रेस के अजीत शर्मा  व भाजपा नभय कुमार चौधरी के बीच  सीधी टक्कर है. भाजपा जहां 24 साल के अपने किले को बचाने  के लिए प्रयास कर रही है, वहीं कांग्रेस हर हाल में इस सीट को भाजपा से छीनने का प्रयास कर रही है.

कांग्रेस ने 24 साल बनाम 14 माह का नारा देकर चुनावी जंग को दिलचस्प बना दिया है. कांग्रेस प्रत्याशी  जहां चुनावी मैदान के पुराने खिलाड़ी हैं. वहीं भाजपा ने चुनाव प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी अपने पुराने कार्यकर्ता मैदान में उतारा है.  मंगलवार की शाम चुनाव प्रचार का शोर समाप्त हो गया. व प्रत्याशी व उनके समर्थक डोर टू डोर कैंपेन में जुट गये हैं. भाजपा, कांग्रेस, भाकपा माले, सपा सहित सभी निर्दलीय प्रत्याशी   मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. यह सीट अश्विनी चौबे के बक्सर से सांसद निर्वाचित होने पर खाली हुई है.

सवर्ण, वैश्य, , पिछड़ी जाति व मुसलिम  बहुल इस सीट पर 1951 से इस सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी जनसंघ और बाद में भाजपा का कब्जा रहा है. हर चुनाव में ध्रुवीकरण होता रहा है. 1990 से  भागलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है.अगले साल विधानसभा चुनाव होना है.  कांग्रेस आवागमन तथा महंगाई के मुद्दे को जोर शोर से भुना रही है. इसके अलावा सड़क, बिजली, पानी तथा अन्य स्थानीय मुद्दों को उठा रही है. वहीं भाजपा को जदयू, कांग्रेस, व राजद के बीच हुए महागंठबंधन  को मुद्दा बनाया है. भाजपा को  नरेन्द्र मोदी के नाम का सहारा है. भाजपा की ओर से केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद , पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी सहित सांसद सीपी ठाकुर, अश्विनी चौबे, भोला सिंह , सैयद शाहनवाज हुसैन, राम कृपाल यादव नंदकिशोर यादव, चिराग  पासवान, सहित कई नेता चुनाव प्रचार कर चुके हैं. कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, कांग्रेस के राष्ट्रीय  महामंत्री  सीपी जोशी  गंठबंधन के तीनों दल के प्रदेश अध्यक्ष सहित अनेक नेता चुनाव प्रचार कर चुके हैं. सोमवार को कांग्रेस व मंगलवार को भाजपा के रोड शो में काफी भीड़ उमड़ी.

कांग्रेस इस सीट को कितना महत्वपूर्ण मान रही है, यह बात से समझा जा सकता है कि पार्टी के राष्ट्रीय सचिव केएल शर्मा यहां डेरा डाले हुए हैं. वैसे दोनों दल में भितरघात का भी कम खतरा नहीं है. कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों के लिए भागलपुर की जीत नाक का सवाल बन गयी है. दोनों दल यहां की जीत से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संदेश देना चाह रही है.

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