एशियाई खेलों का आज होगा रंगारंग आगाज

एशियाई खेलों का आज होगा रंगारंग आगाज

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दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों, ग्वांग्झू एशियाड, लंदन ओलंपिक और ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का शानदार सफर अब अपने अगले पडाव इंचियोन में 17वें एशियाई खेलों में पहुंच रहा है जहां उसका लक्ष्य 28 साल बाद पदक तालिका में शीर्ष पांच देशों में स्थान हासिल करना है।

भारत ने चार साल पहले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में 38 स्वर्ण सहित 101 पदक जीतने का रिकॉर्ड प्रदर्शन किया था जबकि उसके एक महीने बाद उसने ग्वांगझू एशियाई खेलों में 14 स्वर्ण सहित कुल 65 पदक जीतकर एशियाई खेलों में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। वर्ष 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत ने दो रजत सहित कुल छह पदक जीते थे। हाल में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 15 स्वर्ण सहित कुल 64 पदक जीते थे।

भारत एशियाई खेलों की पदक तालिका में आखिरी बार शीर्षपांचदेशों में 1986 में दक्षिण कोरिया के सोल में रहा था। तब भारत को पांचवां स्थान मिला था। ग्वांग्झू में भारत छठे स्थान पर रहा था जबकि इससे पहले भारत को 2006 के दोहा एशियाड में आठवां, 2002 के बुसान एशियाड में सातवां, 1998 के बैंकॉक एशियाड में नौंवा और 1994 के हिरोशिमा एशियाड में आठवां स्थान मिला था।

वर्ष 1990 के बीजिंग एशियाड में भारत टॉप टेन से बाहर रहा था। यह देखना दिलचस्प होगा कि सोल के बाद दक्षिण कोरिया का एक और शहर इंचियोन भारत के लिए भाग्यशाली साबित होता है या नहीं। भारत ने पिछले चार वर्षों में बड़े खेल आयोजनों में जिस तरह अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है उससे उम्मीद बंधती है कि भारत पदक तालिका में फिर से शीर्ष पांच में आने का अपना सपना पूरा कर सकता है।

भारत इंचियोन में 516 एथलीटों सहित 679 सदस्यीय दल उतार रहा है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक जीजी थॉमसन ने उम्मीद जताई थी कि भारत इंचियोन में इस बार कम से कम 70 पदक जीतेगा। हालांकि इस आंकड़े में स्वर्ण संख्या का कोई अंदाजा नहीं लगाया गया है।

साई को इन खेलों में निशानेबाजी में दस से 14 पदक और एथलेटिक्स में 12 से 16 पदक की उम्मीद है। भारत को पुरुष और महिला कबड्डी में दो स्वर्ण पदक मिलने तय है जबकि वह बैडमिंटन, स्कवैश, मुक्केबाजी और कुश्ती से भी पदकों की उम्मीद कर रहा है।

हालांकि भारत की पदक उम्मीदों को शीर्ष टेनिस खिलाडियों सोमदेव देववर्मन, लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना के हटने से गहरा झटका लगा है। सोमदेव ने ग्वांग्झू में दो स्वर्ण पदक जीते थे। शीर्ष महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने भी एशियाड से हटने का भी फैसला किया था लेकिन उन्होंने अपना फैसला बदलते हुए एशियाड में उतरने का निर्णय लिया है।

पुरुष और हॉकी महिला टीमों के लिए यह खेल बहुत महत्वपूर्ण है। स्वर्ण जीतने पर इन्हें रियो ओलंपिक के लिए सीधा टिकट मिल जाएगा। भारतीय पुरुष टीम पिछली बार सेमीफाइनल में मलेशिया से हारने के बाद कांस्य पदक पर ठिठक गयी थी।

भारत को निशानेबाजी से सबसे ज्यादा उम्मीदें रहेंगी जहां पिछली बार भारत ने एक स्वर्ण सहित आठ पदक जीते थे लेकिन तब स्वर्ण जीतने वाले रोंजन सोढी इस बार टीम से बाहर है। ओलंपिक स्वर्ण विजेता अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग चार वर्ष पहले स्वर्ण न जीत पाने की कसर इस बार पूरी करने उतरेंगे।

बिन्द्रा के खाते में एशियाई खेलों में एक भी व्यक्तिगत पदक नहीं है। उन्होंने ग्वांग्झू में टीम स्पर्धा में रजत जीता था। उनके पास एशियाई खेलों में पदक जीतने का यह आखिरी मौका होगा। बिन्द्रा राष्ट्रमंडल खेलों में ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीतने के बाद राष्ट्रमंडल खेलों को अलविदा कह चुके है और इस बार वह एशियाड में भी कुछ ऐसा ही करना चाहेंगे।

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