शिखर वार्ता में नरेंद्र मोदी और चीन के शी जिनपिंग की बातचीत

शिखर वार्ता में नरेंद्र मोदी और चीन के शी जिनपिंग की बातचीत

xi-modi

भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह एक-दूसरे के प्रति विश्वास जताया है, वह एशिया ही नहीं पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत में कई जरूरी मुद्दे उठे और आपसी सहयोग पर सहमति बनी। इसमें बहुत सी चीजें अनसुलझी लगती हैं, पर यह समझ जरूर बनी है कि उन पर धीरे-धीरे बात करके कोई रास्ता ढूंढा जाएगा।

चीन फिलहाल भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए तैयार हुआ है। सिविल न्यूक्लियर मामले में सहयोग के लिए दोनों देश बातचीत करने पर सहमत हुए हैं। शिखर वार्ता में दोनों देशों के बीच 12 समझौते हुए, जिनमें पांच साल के आर्थिक प्लान पर हुआ करार बेहद अहम है। कैलाश यात्रा के लिए नए रूट, ऑडियो वीडियो मीडिया, रेलवे के आधुनिकीकरण, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ। कस्टम को आसान करने का करार हुआ है।

मुंबई को शंघाई की तरह विकसित करने में चीन मदद करेगा और गुजरात तथा महाराष्ट्र में दो इंडस्ट्रियल पार्क बनाएगा। जाहिर है, भारत के तेज विकास और आधुनिकीकरण में चीन की भूमिका बढ़ने वाली है। निश्चय ही इसका लाभ चीनी इकॉनमी को भी मिलेगा। लेकिन देखना होगा कि स्थायी सिरदर्द का रूप ले चुके सीमा तनाव से आर्थिक सहयोग की विराट संभावना में कोई बाधा न आए।

कारोबारी गतिविधियां तभी सुचारू रूप से चल पाती हैं जब दो मुल्कों के सियासी और कूटनीतिक रिश्ते बेहतर होते रहें। अभी जो भरोसा राजनयिक स्तर पर कायम हुआ है, वह दोनों देशों की जनता के बीच भी बनना चाहिए, तभी आर्थिक समझौतों का कोई मतलब है। इसके लिए दोतरफा सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाना एक अच्छा रास्ता है।

दुर्भाग्य से शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान ही जम्मू-कश्मीर के चुमार इलाके में चीनी सेना की घुसपैठ का मामला सामने आ गया। शिखर वार्ता में यह मसला भी उठा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्होंने चीन से अपनी वीजा नीति पर भी स्टैंड साफ करने को कहा। यह मसला अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर के लोगों को स्टेपल्ड वीजा दिए जाने को लेकर उठता रहा है।

चीनी राष्ट्रपति का मानना है कि भारत-चीन की सीमा चिह्नित न होने के कारण वहां कुछ ऐसी गतिविधियां होती हैं जिससे गलतफहमी फैलती है। शी ने इस मुद्दे को सुलझाने का आश्वासन भी दिया है। दोनों देशों को यह बात समझनी होगी कि सीमा पर स्थायी शांति कायम करके ही आर्थिक रिश्तों को दूर तक ले जाया जा सकेगा।

भारत के आम लोगों में जब तक चीन को लेकर पॉजिटिव राय नहीं बनेगी, तब तक उसका निवेश यहां अन्य देशों जितना सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए आशा की जानी चाहिए कि इस दिशा में अलग से पहल होगी। अभी सीमावर्ती क्षेत्रों का टकराव सुलझाने के लिए फ्लैग मीटिंग का जो सिस्टम चल रहा है, उसे तत्काल फूलप्रूफ शक्ल देने की जरूरत है, लेकिन इसके लिए सैन्य नेतृत्व के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था बनानी होगी।

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