उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप

ब्लड प्रेशर रक्त द्धारा धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को कहते हैं। सामान्यतः हमारी धमनियों में बहने वाले रक्त का एक निश्चित दबाव होता है, जब यह दबाव अधिक हो जाता है तो धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है और इस स्थति को उच्च रक्तचाप से जाना जाता है और इस स्थति में आपके ह्रदय को अधिक काम करना पड़ता है। लगातार उच्च रक्तचाप शरीर को कई तरीके से हानि पहुंचा सकता है। यहाँ तक की हार्ट फेल भी हो सकता है।
उच्च रक्तचाप के कारण
उच्च रक्तचाप के सही कारणों के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन उच्च रक्तचाप के होने में बहुत सारे फैक्टर्स अहम भूमिका निभाते हैं जैसे कि :
• तनाव
• बढ़ती उम्र
• अनुवांशिकता
• पारिवारिक इतिहास
• पुरानी किडनी की बीमारी
• थाइरोइड डिसऑर्डर
• धूम्रपान
• मोटापा
• निष्क्रियता
• नमक का ज्यादा सेवन
• शराब पीना

रक्तचाप को नापने का तरीका
रक्तचाप नापते समय दो तरह के अंक सामने आते हैं।
पहला और बड़ा अंक सिस्टोलिक दबाव यानी धमनियों पर पड़ने वाला वह दबाव जब ह्रदय धमनियों में रक्त भेजता है।
दूसरा अंक डायास्टोलिक दबाव का सूचक है यानी जब ह्रदय आराम करता है, तब धमनियों पर पड़ने वाला दबाव ।
एक सेहतमंद इंसान का सामान्य तौर पर रक्तचाप १२०/८० होता है। परिस्थितियों के अनुसार रक्तचाप घटता बढ़ता रहता है।
यह व्यक्ति दर व्यक्ति अलग भी हो सकता है। लेकिन जब यह लगातार ऊपर या नीचे रहे तो हमें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चहिये, क्योंकि उच्च रक्तचाप अगर लगातार बना रहे तो यह शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है।

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