इन 72 कानूनों का नहीं रह गया कोई मतलब

इन 72 कानूनों का नहीं रह गया कोई मतलब

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नई दिल्ली। भारतीय विधि आयोग (लॉ कमीशन ऑफ इंडिया) ने शुक्रवार को उन कानूनों के बारे मे अपनी विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद को अंतरिम रिपोर्ट पेश कर दी है, जिनका मौजूदा दौर में कोई मतलब नहीं रह गया है। कमीशन के चेयरमैन पूर्व जस्टिस अजित प्रकाश शहा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन सभी कानूनों का औचित्य अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
कमीशन ने इन कानूनों को खत्म करने की सिफारिश की है। इनमें से ज्यादातर कानून 1836-1898 के बीच के हैं। रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद प्रसाद ने कहा, “नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार प्रचलन से बाहर हो चुके कानूनों को खत्म करने के लिए उत्सुक हैं। ऎसे 32 कानूनों को खत्म करने से संबंधित विधेयक पहले ही संसद में लंबित हैं।

इनकी नहीं अब अहमियत

शेरिफ्स फीस एक्ट, एक्ट 8, 1852
तत्कालीन बांबे, कलकत्ता, मद्रास के शैरिफ को अदालत द्वारा जारी प्रक्रियाओं को लागू कराने के एवज में प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था थी। अब शैरिफ सिस्टम ही नहीं रहा।

हावड़ा ऑफेंसेज एक्ट, एक्ट 21, 1857
हावड़ा में अपराधों के लिए बनाया गया था। इसमें आखिरी मामला वर्ष 1956 में दर्ज किया गया।

सरायज एक्ट, एक्ट 22, 1867
होटल संचालन के राज्य सरकारों के नियम हैं, लिहाजा यह कानून बेमतलब हो गया। स्थानीय पुलिस सराय एक्ट के तहत होटलों के उत्पीड़न की घटनाएं हो रही थीं।

ड्रामेटिक परफॉरमेंसेज एक्ट, एक्ट 19, 1876
मानहानि या जनभावना भड़काने के नाम पर इसका उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ होता था।

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