अमेरिकी सेना की पहली हिंदू चैपलिन

अमेरिकी सेना की पहली हिंदू चैपलिन

पटना में पैदा हुई प्रतिमा मुंबई में पली-बढ़ी। पिता बाटा में नौकरी करते थे, ट्रांसफर होने पर मुंबई आ गए। शादी होने पर अमेरिका गईं प्रतिमा अमेरिका सेना की भी पहली हिंदू चैपलिन हैं। पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर (अमेरिकी रक्षा विभाग में)काम करते है| 2006 में जब वे थियोलॉजी में मास्टर्स डिग्री ले रही थीं, तभी अमेरिकी सेना की ओर से फोन आया। वे चौंक गईं जब दूसरी ओर से कहा गया कि अमेरिकी सेना आपको चैपलिन बनाना चाहती है। वे चिन्मय मिशन से संबंध रखती हैं। जिस समय अमेरिका की सेना को इराक भेजा गया, तो उनको भी जाना था। फोर्स की काउंसिलिंग वे करती थीं। हालांकि यूएस आर्मी ने जाने के चार माह पहले ही बता दिया था। ऐसे में वे पांच माह की अपनी बेटी को पति, मां और सास के पास छोड़कर गईं।  कई अमेरिकी जवान निराशा में उनके टेंट में आते थे, क्योंकि सामने मौत थी। 5000 सैनिकों का जिम्मा उनके पास था। उन्होंने भगवद् गीता का सहारा लेकर काउंसिलिंग की। सैनिकों को आत्महत्या करने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी।  वे कहती हैं- भारत में हर व्यक्ति की बातचीत में अध्यात्म झलकने लगता है। उनके दादा भी गांधीवादी थे, इसलिए कहती हैं- जड़ें भारत में ही हैं।

You must be logged in to post a comment Login