अब हर राज्य में होगा एम्स जैसा अस्पताल

अब हर राज्य में होगा एम्स जैसा अस्पताल

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नई दिल्ली | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि हर एक राज्य में एम्स जैसा एक-एक संस्थान बनाने के केन्द्र के प्रस्ताव का सभी राज्यों ने स्वागत किया है। मंत्री ने बताया कि अब तक 12 राज्य सरकारों से ऐसे संस्थानों के लिए भूमि प्रदान करने की बातचीत शुरू की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इसके अलावा मेडिकल कॉलेज कोलकाता और आगरा मेडिकल कॉलेज जैसे पुराने अस्पतालों को एम्स के तहत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के रूप में उन्नत करने के लिए केन्द्र ने 170 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और जनता के वर्तमान अनुपात 1,1700 में सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने स्वीकार किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य गारंटी मिशन (एनएचएएम) को और अधिक सार्थक बनाने के लिए अगले कुछ महीनों में सघन विचार-विमर्श की जरूरत होगी ताकि इसे गतिशील और सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्त माध्यम बनाया जा सके। वर्तमान में एनएचएएम को तैयार किया जा रहा है और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जायेगा। इसे स्वीकृति मिलने के बाद इसे चालू वित्त वर्ष से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि अखिल भारतीय अभियान दिवसों के कार्यक्रम से कई संवेदनशील सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों से संबंधित सूचनाओं और प्रबोधन सेवाओं से जनता सशक्त बन सकेगी। इन दिवसों को व्यापक संपर्क अभियान के रूप में मनाया जायेगा और इन अवसरों पर निशुल्क निदान टीकाकरण और एहतियाती सेवाएं देशभर में उपलब्ध कराई जायेंगी। एहतियाती अभियान के लिए बीमारियों और उनसे संबंधित स्थितियों की सूची तैयार की गई है। ये हैं-रूबेला के साथ चेचक, मलेरिया, कैंसर, मधुमेह, तनाव, टी बी और क्षयरोग मोटापा, मोतियाबिंद, बहरापन और एड्स। जीवनशैली से संबंधित बीमारियों पर भी ध्यान केन्द्रित किया जायेगा। इस क्षेत्र में तम्बाकू और शराब का सेवन, सफाई, सार्वजनिक और शारीरिक स्वच्छता, अंगदान का महत्व, रक्तदान को बढ़ावा और वृद्धजनों की स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अखिल भारतीय अभियान के विशेष दिनों में पोषण, पेट से कीडों की समाप्ति और खून की कमी रोकने के उपायों पर जोर दिया जाए। मातृ सुरक्षा के माध्यम से जच्चा की जीवन सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा। दिनभर की बैठक में राज्यों के स्वास्य सचिवों ने गंभीर सुझाव प्रस्तुत किये। प्रत्येक स्वास्थ्य सचिव ने डॉक्टर हर्षवर्धन के एनएचएएमए बीमारियों के उन्मूलन और नियंत्रण के लिए अखिल भारतीय कार्य दिवसों, चिकित्सा शिक्षा के नये युग और प्रधानमंत्री स्वाथ्य सुरक्षा योजना में सुधार जैसे प्रस्तावों का स्वागत किया। बैठक में दवाओं और खान-पान की नियामक प्रणाली, इलैक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड आदि पर भी चर्चा की गई। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कई राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों और विशेष तौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनुसंधान सुविधाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। बैठक में डॉ. हर्षवर्धन दिनभर रहे। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉक्टर जगदीश प्रसाद भी उपस्थित रहे।

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